Last Updated:
क्या कोई ऐसी खेती है जो एक बार लगाने पर 70 सालों तक छप्पर फाड़ कमाई दे? जी हां, एक खास फल के पेड़ न केवल आपकी बंजर जमीन को उपजाऊ बनाएंगे, बल्कि आने वाली तीन पीढ़ियों की किस्मत भी बदल देंगे. महज एक पेड़ से सालाना ₹40,000 तक की कमाई का यह ‘गोल्डन प्लान’ क्या है, जानिए कृषि विशेषज्ञों की जुबानी.
हजारीबाग: खेती के साथ-साथ पेड़ लगाकर कमाई करना आज के समय में किसानों के लिए एक समझदारी भरा कदम बनता जा रहा है. मौसम की अनिश्चितता, बढ़ती लागत और फसल के सही दाम न मिलने की समस्या के कारण केवल पारंपरिक खेती पर निर्भर रहना अब पहले जैसा सुरक्षित नहीं रहा. ऐसे में किसान कटहल की खेती करके भी अच्छी कमाई कर सकते हैं. खास बात यह है कि किसान एक बार पौधे लगाकर 60 से 70 वर्षों तक नियमित आय प्राप्त कर सकते हैं. कहा जाए तो एक पीढ़ी की मेहनत से लगाया गया बाग आने वाली दो पीढ़ियों के लिए आय का स्थायी साधन बन सकता है.
इस विषय पर आईसेक्ट विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिक डॉ. अरविंद कुमार सिंह बताते हैं कि कटहल की खेती किसानों के लिए कम लागत और अधिक मुनाफे वाला विकल्प साबित हो सकती है. एक बार पौधारोपण करने के बाद कई वर्षों तक इससे निश्चिंत कमाई की जा सकती है. झारखंड की जलवायु इस फसल के लिए बेहद अनुकूल है. यहां की पथरीली और यहां तक कि आंशिक बंजर भूमि पर भी कटहल का पेड़ तेजी से बढ़ता है. यही कारण है कि राज्य में उपलब्ध बड़ी मात्रा में अनुपयोगी या खाली पड़ी जमीन को आय के स्रोत में बदला जा सकता है.
एक पेड़ से सालाना 40 हजार तक आय
उन्होंने आगे बताया कि कटहल का पौधा सामान्यतः 6 से 7वर्षों में फल देना शुरू कर देता है. एक परिपक्व पेड़ से हर साल 80 से 200 तक फल प्राप्त हो सकते हैं. बाजार में एक अच्छे आकार के कटहल की कीमत 100 से 200 रुपये या उससे अधिक तक मिल जाती है, जो सीजन और मांग पर निर्भर करती है. इस प्रकार एक विकसित पेड़ से सालाना 30 हजार से 40 हजार रुपये तक की आय संभव है, बड़े पैमाने पर बागवानी करने वाले किसान इससे लाखों रुपये का वार्षिक मुनाफा कमा सकते हैं.
कटहल की खेती का एक और लाभ यह है कि इसमें सिंचाई और रासायनिक खाद की आवश्यकता अपेक्षाकृत कम होती है. किसान देसी प्रजातियां बरमसिया प्रजाति की खेती लगा सकते हैं. अगेती फल देने वाले कटहल में अच्छी कमाई हो सकती है. शुरुआती वर्षों में पौधों की सुरक्षा और नियमित सिंचाई जरूरी होती है, लेकिन बाद में पेड़ स्वयं मजबूत हो जाते हैं. जैविक खाद का उपयोग करने से उत्पादन और गुणवत्ता दोनों बेहतर होती है. इसके अलावा कटहल के फल के साथ-साथ इसकी लकड़ी भी मूल्यवान होती है, जिसका उपयोग फर्नीचर और निर्माण कार्य में किया जाता है. इस प्रकार यह पेड़ बहुउपयोगी साबित होता है.
आज के दौर में जब किसान आय के नए स्रोत तलाश रहे हैं, तब कटहल की बागवानी एक दीर्घकालिक निवेश के रूप में उभर रही है. यदि वैज्ञानिक तरीके से पौधारोपण, उचित दूरी, समय-समय पर छंटाई और बाजार से सीधा जुड़ाव सुनिश्चित किया जाए, तो यह खेती ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती है.
About the Author
मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.