उमरिया जिले से सटे उत्तर शहडोल वन मंडल के वनचाचर बीट में दो बाघों के बीच हुए संघर्ष के बाद घायल हुए एक नर बाघ को वन विभाग की संयुक्त टीम ने सुरक्षित रेस्क्यू कर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के बहेरहा एनक्लोजर में शिफ्ट किया है। पूरे अभियान में वन अधिकारियों, वन्य प्राणी स्वास्थ्य विशेषज्ञों, हाथी दल और रेस्क्यू टीम की अहम भूमिका रही। फिलहाल बाघ का उपचार जारी है और उस पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
संघर्ष की सूचना मिलते ही हरकत में आया वन अमला
वनचाचर बीट के कक्ष क्रमांक 380 आरएफ क्षेत्र में दो बाघों के बीच संघर्ष की सूचना मिलते ही वन विभाग सक्रिय हो गया। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ कि एक बाघ गंभीर रूप से घायल हुआ है। इसके बाद तत्काल रेस्क्यू टीम को वाहन सहित मौके पर रवाना किया गया। टीम ने इलाके में पैदल गश्त कर बाघ की मौजूदगी के संकेत जुटाए। पंजों के निशान मिले, लेकिन बाघ प्रत्यक्ष रूप से नजर नहीं आया, जिससे अभियान को सावधानी के साथ आगे बढ़ाया गया।
बारिश बनी चुनौती, हाथियों की मदद से चला सर्च ऑपरेशन
लगातार बारिश के कारण इलाके में बाघ के पदचिह्न मिट गए, जिससे सर्च ऑपरेशन में दिक्कतें आईं। ऐसे में वन विभाग ने हाथियों की मदद से गश्त शुरू की। चीतल की कॉलिंग के आधार पर संभावित स्थानों की पहचान कर टीम ने खोजबीन तेज की। इसी दौरान हाथी महावत को बाघ दिखाई दिया, जिसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल सूचना दी गई।
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विशेषज्ञों की मौजूदगी में चला रेस्क्यू अभियान
सूचना मिलते ही क्षेत्र संचालक, वन्य प्राणी स्वास्थ्य अधिकारी, उप संचालक पनपथा, उप वन मंडल अधिकारी ब्यौहारी और जयसिंहनगर रेंज के अधिकारियों समेत पूरी रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। बाघ तक सुरक्षित पहुंच बनाने के लिए रणनीति तैयार की गई। वन्य प्राणी स्वास्थ्य अधिकारी ने विशेष उपकरणों की मदद से घायल नर बाघ को बेहोश कर सुरक्षित काबू में लिया। मौके पर ही उसका प्राथमिक परीक्षण किया गया और जरूरी उपचार दिया गया।
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के बहेरहा एनक्लोजर में शिफ्ट
रेस्क्यू के बाद बाघ को विशेष वाहन के जरिए बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, उमरिया के मगधी परिक्षेत्र स्थित बहेरहा एनक्लोजर लाया गया। यहां विशेषज्ञों की निगरानी में उसका विस्तृत स्वास्थ्य परीक्षण किया गया और उसे सुरक्षित सेक्शन में छोड़ दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि एनक्लोजर पूरी तरह सुरक्षित है, जहां बाहरी हस्तक्षेप से दूर रखकर बाघ के व्यवहार और स्वास्थ्य पर नजर रखी जा रही है।
क्या है एनक्लोजर की खासियत?
बहेरहा टाइगर एनक्लोजर कई हेक्टेयर में फैला एक नियंत्रित प्राकृतिक क्षेत्र है, जिसमें अलग-अलग सेक्शन बनाए गए हैं। यहां प्राकृतिक वनस्पति, जल स्रोत और पर्याप्त एकांत मौजूद है, जिससे बाघ का व्यवहार स्वाभाविक बना रहता है। कैमरा ट्रैप और फील्ड स्टाफ की मदद से चौबीसों घंटे मॉनिटरिंग की जाती है ताकि किसी भी बदलाव पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।
आगे क्या होगा?
वन्य प्राणी विशेषज्ञों के अनुसार बाघ के शारीरिक स्वास्थ्य, आक्रामकता के स्तर और शिकार करने की क्षमता का आकलन किया जाएगा। यदि बाघ पूरी तरह स्वस्थ और प्राकृतिक परिस्थितियों में जीवित रहने के योग्य पाया गया, तो सक्षम प्राधिकारी की अनुमति से उसे फिर से सुरक्षित वन क्षेत्र में छोड़ा जाएगा। क्षेत्रीय अधिकारियों का कहना है कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में इस तरह के रेस्क्यू ऑपरेशन वन्यजीव संरक्षण की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं और इससे बाघों की सुरक्षा के प्रति विभाग की सजगता भी सामने आती है।
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