इंदौर स्थित देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग में रैगिंग का बेहद गंभीर मामला प्रकाश में आया है। संस्थान के डी-होस्टल में रहने वाले बीटेक प्रथम वर्ष के छात्रों ने द्वितीय वर्ष के सीनियर छात्रों पर प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं। इस शिकायत के प्राप्त होने के बाद कॉलेज प्रशासन ने आरोपियों के खिलाफ विस्तृत जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है।
जबरन नशा करने का दबाव बनाया जाता है
पीड़ित जूनियर छात्रों का आरोप है कि सीनियर छात्र उन्हें न केवल मानसिक रूप से प्रताड़ित करते हैं बल्कि उन्हें जबरन सिगरेट पीने के लिए भी मजबूर करते हैं। जब किसी छात्र द्वारा इसका विरोध किया जाता है, तो उसे बैच आउट करने की धमकी दी जाती है। ज्ञात हो कि बैच आउट किए गए छात्रों को कॉलेज की तमाम शैक्षणिक और सांस्कृतिक गतिविधियों से पूरी तरह अलग-थलग कर दिया जाता है। इसके अलावा जूनियर्स को हमेशा सिर झुकाकर बात करने और सीनियर्स के सामने हाथ जोड़कर खड़े रहने के लिए विवश किया जाता है।
रैगिंग में जूनियर्स ने भी सीनियर्स का साथ दिया
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए संस्थान प्रबंधन ने मंगलवार को एंटी रैगिंग कमेटी की एक आपातकालीन बैठक बुलाई। प्रारंभिक जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य भी सामने आया है कि इस तरह की अनुचित गतिविधियों में कुछ प्रथम वर्ष के छात्र भी सीनियर्स का साथ दे रहे थे। पूछताछ के दौरान कुछ विशिष्ट सीनियर छात्रों के नाम चिन्हित किए गए हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, दोषी पाए जाने वाले छात्रों को एक वर्ष के लिए निष्कासित किया जा सकता है या उन्हें कॉलेज से टीसी थमाई जा सकती है।
कई छात्रों ने रैगिंग की शिकायत की
शुरुआत में केवल एक छात्र ने फोन के माध्यम से प्रबंधन को इस स्थिति की जानकारी दी थी। हालांकि, जब संस्थान ने सख्ती दिखाई और सभी जूनियर छात्रों से व्यक्तिगत रूप से चर्चा की, तो लगभग 7 से 8 छात्रों ने अपने साथ हुई रैगिंग की पुष्टि की। लगातार सामने आ रहे इन मामलों ने विश्वविद्यालय प्रबंधन की चिंता बढ़ा दी है। इसी कारण इस बार किसी भी प्रकार की नरमी न बरतते हुए सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की तैयारी की जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर लगाम लगाई जा सके।
बैच इन और बैच आउट का भयावह खेल
कॉलेज परिसर में प्रचलित बैच इन और बैच आउट की परंपरा छात्रों के लिए मानसिक तनाव का कारण बनी हुई है। जो छात्र सीनियर्स की हर बात मानते हैं, उन्हें बैच इन रखकर सभी कार्यक्रमों में सहयोग दिया जाता है। वहीं, जो छात्र सीनियर्स के आदेशों का पालन नहीं करते, उन्हें बैच आउट घोषित कर दिया जाता है। ऐसे छात्रों को हॉस्टल में कदम-कदम पर परेशान किया जाता है और उन्हें किसी भी मुख्यधारा के आयोजन का हिस्सा नहीं बनने दिया जाता है।
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