इंदौर में सामने आए सनसनीखेज डीप फेक वीडियो के बाद कई खुलासे हो रहे हैं। हाल ही में क्राइम ब्रांच के पास एक केस आया जिसमें एक छात्र के गायब होने के बाद आरोपियों ने उसका डीपफेक वीडियो तैयार किया। इसमें दावा किया कि बच्चा उनके कब्जे में है और परिजन से एक लाख दो हजार रुपए ट्रांसफर करवा लिए। इस मामले में पुलिस आरोपियों की तलाश कर रही है लेकिन इसके बीच एक नया खुलासा हुआ है।
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ब्लैकमेलिंग के मामलों में केस दर्ज नहीं करवाते पीड़ित
पुलिस अधिकारियों ने बताया है कि यह डीपफेक वीडियो से अपराध करने का पहला मामला नहीं है बल्कि पहले भी डीपफेक वीडियो से जुड़े कई मामले पुलिस के पास सामने आ चुके हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर क्राइम के अधिकतर मामलों में पीड़ित केस दर्ज नहीं करवाते। यह मामला बच्चे के अपहरण से जुड़ा है और परिजन ने तुरंत पुलिस को इसकी सूचना दी।
बुजुर्ग, प्रभावशाली लोग निशाने पर
वहीं महिलाओं द्वारा ब्लैकमेलिंग, चैटिंग, वीडियो रिकार्डिंग की बातचीत के बाद डीपफेक वीडियो बनाना और इस तरह के अन्य मामलों में डीपफेक वीडियो के इस्तेमाल पर लोग पुलिस के पास नहीं आते। बदनामी के डर से वे कई बार लाखों रुपए गंवाने के बाद भी पुलिस को इसकी सूचना नहीं देते। क्राइम ब्रांड के एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया ने बताया कि पुलिस शिकायत करने वाले की जानकारी पूरी तरह से गोपनीय रखती है। हम कई बार पीड़ितों को समझाते भी हैं कि केस दर्ज करवाने से वे आरोपियों को सजा दिलवा पाएंगे लेकिन फिर भी कई मामलों में पीड़ित केस दर्ज नहीं करवाते।
नाराजगी के बाद घर से निकला था किशोर
पुलिस के पास हालिया घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब 10वीं कक्षा में पढ़ने वाले एक छात्र को स्कूल की छुट्टियों के विषय पर परिजनों ने डांट दिया था। इस बात से नाराज होकर वह किशोर ट्यूशन जाने के बाद बिना किसी को बताए सांवरिया सेठ के दर्शन करने निकल गया। जब वह घर नहीं लौटा, तो चिंतित परिजनों ने उसकी खोजबीन शुरू की। उन्होंने सोशल मीडिया पर उसकी फोटो और संपर्क नंबर साझा किए और साथ ही एमआईजी थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज करवाई।
डीप फेक तकनीक से रची गई साजिश
परिजनों द्वारा सोशल मीडिया पर साझा की गई फोटो का फायदा उठाकर बदमाशों ने एक खौफनाक साजिश रची। ठगों ने डीप फेक तकनीक का इस्तेमाल कर बच्चे का एक नकली वीडियो तैयार किया और परिजनों को वीडियो कॉल कर दावा किया कि बच्चा उनके कब्जे में है। वीडियो में बच्चे की जान को खतरा दिखाते हुए बदमाशों ने फिरौती की मांग की। डर के मारे परिवार ने बदमाशों के बताए क्यूआर कोड पर कुल 1 लाख 2 हजार रुपए ट्रांसफर कर दिए।
बच्चे ने फोन किया तब धोखाधड़ी का पता चला
अगले दिन स्थिति तब स्पष्ट हुई जब बच्चे ने स्वयं अपने एक मित्र को फोन करके बताया कि वह सुरक्षित है और सांवरिया सेठ में है। तब जाकर परिवार को समझ आया कि उनके साथ डिजिटल धोखाधड़ी हुई है। एडिशनल डीसीपी क्राइम ब्रांच राजेश दंडोतिया ने कहा कि उन सभी कॉल रिकॉर्ड्स और टेक्निकल इनपुट्स पर काम कर रही है ताकि जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार किया जा सके।
आरोपियों की लोकेशन तलाश रही पुलिस
बच्चे के अपहरण के मामले में बुधवार को पीड़ित परिवार के सदस्य क्राइम ब्रांच कार्यालय पहुंचे, जहां उनके विस्तृत बयान दर्ज किए गए। इन बयानों के आधार पर पुलिस की विशेष टीम अब साक्ष्य जुटाने में लगी है। जांच दल न केवल संदिग्ध मोबाइल नंबरों की लोकेशन ट्रैक कर रहा है, बल्कि अन्य महत्वपूर्ण तकनीकी डेटा भी खंगाल रहा है ताकि अपराधियों तक पहुंचा जा सके।
क्यूआर कोड और बैंक खातों की पड़ताल
क्राइम ब्रांच की टीम उस डिजिटल ट्रेल का पीछा कर रही है जिसके जरिए ठगी की गई। पुलिस उन क्यूआर कोड्स की गहनता से जांच कर रही है जिनका उपयोग पैसे ट्रांसफर करने के लिए किया गया था। जांच का मुख्य उद्देश्य उन बैंक खातों की पहचान करना है जिनमें वसूली गई राशि जमा हुई है। अधिकारियों का मानना है कि खातों के विवरण से इस गिरोह के मास्टरमाइंड का सुराग मिल सकता है।
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