नीट पीजी काउंसलिंग 2026 के अंतर्गत एनआरआई कोटे की सीटों को लेकर कोर्ट ने मध्य प्रदेश पीजी एडमिशन नियम का हवाला देते हुए डीएमई को निर्देशित किया है कि पात्र छात्रों को अंतिम राउंड तक मौका दिया जाए। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस बात को स्वीकार किया कि जब तक योग्य एनआरआई अभ्यर्थी मौजूद हैं, तब तक उनकी सीटों को अन्य कोटे में परिवर्तित करना न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता।
इस याचिका में चिकित्सा शिक्षा निदेशालय (डीएमई) द्वारा चौथे मॉप-अप राउंड में रिक्त रह गई एनआरआई सीटों को जनरल कोटे में परिवर्तित करने के निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं के वकील हेमेंद्र जैन ने याचिका के माध्यम से स्पष्ट किया कि वर्तमान नियमों के तहत एनआरआई अभ्यर्थी प्रथम, द्वितीय और मॉप-अप राउंड तक प्रवेश पाने के पात्र होते हैं। बावजूद इसके डीएमई द्वारा अंतिम चरणों में इन सीटों को सामान्य वर्ग में बदल दिया जाता है, जिससे पात्र छात्रों के संवैधानिक और वैधानिक अधिकारों का सीधा हनन हो रहा है।
इस मामले में याचिकाकर्ताओं का पक्ष रखते हुए सीनियर एडवोकेट अजय बागड़िया और हेमेंद्र जैन ने तर्क दिया कि जब तक अंतिम राउंड तक पात्र एनआरआई अभ्यर्थी उपलब्ध हैं, तब तक नियमानुसार उन्हें उनके आरक्षित कोटे की सीटों पर ही प्रवेश मिलना चाहिए। सीटों को समय से पूर्व जनरल कोटे में परिवर्तित करना न केवल स्थापित नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के भी विपरीत है। इसी आधार पर कोर्ट से मांग की गई कि काउंसलिंग प्रक्रिया में नियमों की पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने पात्र छात्रों को अंतिम राउंड तक मौका देने का आदेश जारी किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला एनआरआई छात्रों के अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जो मेडिकल काउंसलिंग प्रक्रिया में जवाबदेही तय करता है। इस हस्तक्षेप से भविष्य में होने वाली काउंसलिंग प्रक्रियाओं में भी नियमों के पालन हो सकेगा।
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