इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी के कारण फैली महामारी थमने का नाम नहीं ले रही है। गुरुवार को भर्ती मरीज के परिजनों को उस वक्त परेशान होना पड़ा, जब बांबे अस्पताल में भर्ती एकनाथ सूर्यवंशी की स्थिति और बिगड़ गई। स्वास्थ्य विभाग द्वारा ही भर्ती कराए गए एकनाथ पिछले 12 दिनों से अस्पताल में उपचाररत हैं। जब उनके परिजन अस्पताल पहुंचे तो डॉक्टरों ने बताया कि उनकी हालत नाजुक है और उन्हें दोबारा वेंटिलेटर पर रखा गया है। परिजनों को उनकी मौत होने की जानकारी मिली थी।
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<p>परिजनों का स्पष्ट कहना है कि एकनाथ की यह स्थिति दूषित पानी पीने के बाद शुरू हुई उल्टी-दस्त की शिकायत के कारण हुई है। बीमारी की वजह से आई कमजोरी ने उनके शरीर के दूसरे अंगों पर भी बुरा असर डाला है। जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी इंदौर दौरे पर आए थे, तो उन्होंने विशेष रूप से अस्पताल जाकर एकनाथ का हाल जाना था और डॉक्टरों से चर्चा की थी। मुख्यमंत्री मोहन यादव भी अस्पताल पहुंचकर पीड़ितों से मुलाकात कर चुके हैं।
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बस्ती में हालात लगातार चिंताजनक बने हुए हैं। पिछले दो दिनों के भीतर ही दो लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें पहलवान खूबचंद बधोनिया और लक्ष्मी रजक शामिल हैं। स्थानीय निवासियों के अनुसार अब तक दूषित पानी के कहर से कुल 30 मौतें हो चुकी हैं, जिनमें महिलाओं की संख्या सबसे ज्यादा है। वर्तमान में भी तीन मरीज आईसीयू में अपनी जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहे हैं और छह अन्य लोग अस्पताल के अलग-अलग वार्डों में भर्ती हैं।
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इतनी गंभीर स्थिति के बावजूद स्वास्थ्य विभाग और जनता के बीच मौतों के आंकड़ों को लेकर गहरा विवाद बना हुआ है। स्वास्थ्य विभाग केवल 16 मौतों की वजह ही डायरिया मान रहा है, जबकि बस्ती के लोग इसे सच को छिपाने की कोशिश बता रहे हैं। विभाग के इस अड़ियल रुख से नाराज होकर लोग दो बार शव सड़क पर रखकर प्रदर्शन और चक्काजाम भी कर चुके हैं। लोगों का गुस्सा इस बात को लेकर है कि जब बीमारी की शुरुआत दूषित पानी से हुई, तो प्रशासन अन्य बीमारियों का हवाला देकर जिम्मेदारी से क्यों बच रहा है।
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