इंदौर की कई प्रमुख सड़कें अभी तक ठीक तरह से चौड़ी नहीं हो पाई हैं, लेकिन इंदौर के जीवन रेखा मार्ग रहे एबी रोड के 11 किलोमीटर हिस्से में बीते पंद्रह साल में कई प्रयोग हुए हैं। इन प्रयोगों की प्लानिंग, सर्वे और निर्माण में करोड़ों रुपये खर्च किए गए।
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<p>दस साल पहले 300 करोड़ रुपये की लागत से बीआरटीएस (बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) बनाया गया था, जिसे अब तोड़ा जा रहा है। इसी सड़क पर एलिवेटेड कॉरिडोर भी स्वीकृत है। इसके निर्माण का भूमिपूजन दो साल पहले मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किया था, लेकिन फिर पिछले साल इंदौर के विकास की समीक्षा बैठक में कम ट्रैफिक का हवाला देकर उसे निरस्त कर दिया गया। अब फिर मुख्यमंत्री ने एलिवेटेड कॉरिडोर के प्रोजेक्ट पर ज़ोर दिया है, जिससे भ्रम की स्थिति बन गई है।
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<h3><strong>एबी रोड पर प्रयोगों का इतिहास</strong></h3>
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इंदौर के पुराने एबी रोड से भारी वाहनों का दबाव कम करने के लिए 30 साल पहले रिंग रोड और 20 साल पहले पूर्वी बायपास बनाया गया था। इसके बाद, शहर के मध्य हिस्से से गुजर रहे एबी रोड पर केंद्र सरकार ने बीआरटीएस प्रोजेक्ट को मंजूरी दी। पंद्रह साल पहले इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू हुआ और तीन सौ करोड़ रुपये खर्च हुए।
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बीआरटीएस का निर्माण शुरू हो चुका था और वर्ष 2009 में तत्कालीन केंद्रीय मंत्री कमलनाथ ने इस प्रोजेक्ट पर एलिवेटेड कॉरिडोर की मंजूरी दी थी और 300 करोड़ रुपये स्वीकृत किए थे। इसके निर्माण के लिए मिट्टी परीक्षण भी शुरू किया गया था, लेकिन तब सरकार ने इस प्रोजेक्ट को ज़मीन पर उतारने में रुचि नहीं दिखाई और यह प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में पड़ा रहा। इस बीच, इंदौर विकास प्राधिकरण ने व्हाइट चर्च रोड पर अंडरपास बनाने के लिए सर्वे किया। इस प्लानिंग पर लाखों रुपये खर्च हुए, लेकिन यह प्रोजेक्ट भी आकार नहीं ले पाया।
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<h3><strong>एलिवेटेड कॉरिडोर पर पल-पल बदलते फैसले</strong></h3>
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मुख्यमंत्री बनने के बाद मोहन यादव जब इंदौर आए, तो उनके स्वागत में बड़ा गणपति से राजवाड़ा तक रैली निकाली गई। इसी दौरान, राजवाड़ा पर बीआरटीएस पर एलिवेटेड ब्रिज के निर्माण का भूमिपूजन किया गया। इसके बाद इस प्रोजेक्ट का ठेका गुजरात की कंपनी को दिया गया, लेकिन काम शुरू नहीं हो पाया।
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विकास कार्यों की पिछली बैठक में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने एलिवेटेड कॉरिडोर नहीं बनाने की घोषणा की थी और कहा था कि एलआईजी से नवलखा तक जाने वाले ट्रैफिक का लोड कम है। इसके बाद नगर निगम ने बीआरटीएस पर सात ब्रिज बनाने का फैसला लिया, जिसके लिए सर्वे भी हो चुका है।
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मगर, हाल ही में हुई बैठक में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने<strong> </strong>एलिवेटेड ब्रिज के लिए फिर से सर्वे कराने की बात कही है। विडंबना यह है कि नगर निगम ने बस लेन तोड़ने के बाद डिवाइडर बनाने के टेंडर भी जारी कर दिए हैं। मुख्यमंत्री के इस नए ज़ोर के कारण अब फिर से बदलाव करना पड़ सकता है, जिससे करोड़ों रुपये की योजनाएं अनिश्चितता में पड़ गई हैं।
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