मकान, ऑटो, कार और ये बात तो चौंका देगी
इसके बावजूद रेड क्रॉस सोसाइटी में विकलांगता के तहत मिलने वाला 10 बाई 20 का मकान भी उसके पास है. केवल भीख और मकान किराए से ही उसने इतना पैसा इकट्ठा कर लिया था कि सराफा के कई व्यापारियों को भी वह सप्ताह और दिन के हिसाब से ब्याज पर पैसे देता था. इसके अलावा मांगीलाल के पास दो ऑटो भी हैं, जिसे उसने किराए पर दे रखा है. मांगीलाल के पास एक कार भी है, लेकिन इससे भी ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है उस कार को चलाने के लिए एक ड्राइवर भी था, जिसे वह 12 हजार सैलरी देता था.
इसलिए ज्यादा कमाई
जानकारी के अनुसार, उसके परिवार की हर साल 10 से 15 लाख की कमाई होती थी. भिक्षावृत्ति उन्मूलन समिति के ही नोडल अधिकारी दिनेश मिश्रा ने बताया, मांगीलाल सराफा क्षेत्र में ही घूम कर भीख मांगता था और खासकर जो लोग सोना-चांदी खरीदने आते थे या विदेशी सराफ घूमने थे, उनके पास जाकर भीख मांगता था, इस वजह से उसकी अच्छी खासी कमाई हो जाती थी.
आगे बताया, साल 2024 से ही इंदौर को भिखारी मुक्त करने का अभियान चल रहा है, तब शहर के सर्वे में 6500 भिकारी दर्ज किए गए थे, जिनमें से 4000 से ज्यादा को काउंसलिंग कर भिक्षावृत्ति से मुक्त कराया था. 1500 से ज्यादा भिखारियों को उज्जैन के आश्रम में भेजा गया था. यह अभियान अभी जारी है, लेकिन भिखारी मांगीलाल के मामले ने पूरे इंदौर को चौंका दिया है.
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