हिमाचल प्रदेश के बहुचर्चित 2,100 करोड़ रुपये के इंडियन टेक्नोमेक घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कार्रवाई की दिशा विदेशों में जुटाई गई संपत्तियों की ओर मोड़ दी है। जांच एजेंसी ने मुख्य आरोपी और कंपनी के प्रबंध निदेशक राकेश कुमार शर्मा को औपचारिक रूप से भगोड़ा घोषित करने के लिए विशेष अदालत (ईडी) में अर्जी दाखिल की है। अदालत से राकेश शर्मा को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करने का आग्रह किया गया है। कानून के शिकंजे से बचने के लिए मास्टरमाइंड राकेश भारत छोड़कर यूएई में रह रहा है। ईडी की जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने फर्जी दस्तावेजों और डमी कंपनियों का एक ऐसा जाल बुना, जिसने न केवल सरकारी खजाने को चूना लगाया, बल्कि बैंकिंग सिस्टम में भी सेंध लगा दी। सिरमौर के पांवटा साहिब (माजरा) में रिफाइंड नोबल अलॉयज बनाने के नाम पर खड़ी की गई इस कंपनी ने 1,396 करोड़ रुपये का लोन फर्जी प्रोजेक्ट रिपोर्ट्स और कागजी बिक्री दिखाकर हासिल किया था। जांच में यह एंगल भी सामने आया है कि इस पैसे को व्यापार में लगाने के बजाय शेल कंपनियों के माध्यम से ओडिशा में अवैध खनन गतिविधियों में डायवर्ट किया गया। हाल ही में ओडिशा में हुई छापेमारी और लग्जरी कारों की जब्ती ने इस सिंडिकेट के संगठित स्वरूप को उजागर किया है। अब तक हुई 289 करोड़ रुपये की वसूली के बाद ईडी की नजर अब राकेश शर्मा की उन संपत्तियों पर है, जो उसने कथित तौर पर विदेशी धरती पर बनाई हैं।
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