Last Updated:
चारधाम यात्रा 2026 के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन हो गए हैं . भारतीय रेलवे भी चारधाम यात्रा करने वालों तोहफा देने जा रहा है. चारधाम यात्रा (यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ) को रेल से जोड़ने का काम तेजी से चल रहा है.
सूत्रों के अनुसार रेलवे जल्द इस रूट पर ट्रेन शुरू करने की तैयारी कर रहा है.
रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) के अनुसार, सुरंगों का काम काफी हो चुका है. कुल 38 सुरंगों में से 28 का ब्रेकथ्रू पूरा हो गया है. भारत की सबसे लंबी रेल सुरंग (T-8) का काम भी पूरा हुआ हो चुका है.
कुल बजट करीब 26,841 करोड़ रुपये है, जिसमें से 60-76% खर्च हो चुका है. प्रोजेक्ट में सुरंगों के अलावा पुल, कटिंग और स्टेशन निर्माण का काम भी जारी है.
सूत्रों के अनुसार ऋषिकेश-कर्णप्रयाग लाइन पर आंशिक ट्रेन सेवा जल्द शुरू होने की संभावना है. पूरी लाइन दिसंबर 2027 या 2028 तक चालू हो सकती है. यह प्रोजेक्ट यात्रा को सुरक्षित, तेज और बुजुर्गों के लिए आसान बनाएगा. पहाड़ी इलाके में रेलवे का यह सबसे चुनौतीपूर्ण काम है, लेकिन अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है. यात्रियों को जल्द ही चारधाम तक रेल से पहुंचने की सुविधा मिलेगी.
पीएम का है ड्रीम प्रोजेक्ट
ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक 1 रेल लाइन का काम अगले साल पूरा हो जाएगा. इससे न केवल चारधाम के श्रद्धालुओं को राहत मिलेगी, बल्कि उत्तराखंड के तमाम शहरों की कनेक्टीविटी बढ़ जाएगी.यह रेल लाइन प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट में से एक है. इसलिए रेल लाइन का समय से पूरा होना तय माना जा रहा है. वहीं, श्रीनगर गढ़वाल, गोचर और कालेश्वर में रेलवे स्टेशनों को जोड़ने के लिए मोटर पुलों का निर्माण भी पूरा हो चुका है. यह प्रोजेक्ट देश सबसे अनूठा है, क्योंकि इसमें सबसे लंबी रेलवे टनल बन रही है, जिसकी लंबाई 14.58 किमी. है.
105 किमी. हैं टनल
रेलवे के अनुसार ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक 125 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन में 105 किमी. लाइन 16 मुख्य टनल से होकर गुजरेगी. इन टनल के अलावा 12 निकास टनल और क्रास पैसेज भी हैं, जिन्हें मिलाकर टनल की कुल लंबाई 213 किलोमीटर है. इनमें 160 किलोमीटर में खुदाई का काम पूरा हो चुका है. जल्द ही इन टनल में ट्रैक बिछाने का कार्य भी शुरू हो जाएगा. इस रेल लाइन के ट्रैक मेट्रो रेल जैसे बनाए जाएंगे.
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.