देश की सबसे संवदेनशील उत्तरी-पश्चिमी सीमाएं भावी खतरों से और महफूज रहेंगी, क्योंकि इन सीमाओं की निगहबानी का जिम्मा संभाल रहीं भारतीय सेना की सबसे महत्वपूर्ण वेस्टर्न व नॉर्दर्न कमांड खुद को फ्यूचर वॉर फेयर केंद्रित तकनीकों के जरिये अपग्रेड कर रही हैं। इसके लिए आधुनिकीकरण, इनोवेशन और आत्मनिर्भरता पर मुख्य फोकस रखते हुए तैयारी की जा रही है।
आधुनिक हथियारों, वाहनों, रोबोट, ड्रोन इत्यादि नई तकनीक के उपकरणों से जवानों को लैस किया जा रहा है। इसी दिशा में खड्गा कोर को ड्रोन हब बनाने की तैयारी चल रही है जबकि दुश्मन के इलाके में डीप स्ट्राइक की क्षमता भी अपेक्षाकृत बढ़ाने पर काम चल रहा है।
वीरवार को सेना दिवस के मौके पर भारतीय सेना की ओर से जयपुर में आयोजित होने वाली परेड में भी सैनिकों के साथ स्मार्ट मशीनों का शक्तिशाली संगम देखने को मिलेगा। भारतीय सेना की ओर से वेस्टर्न और नॉर्दर्न कमांड को ही ऐसे आधुनिक उपकरणों व हथियारों से लैस करने पर ज्यादा जोर है क्योंकि ऑपरेशन सिंदूर के बाद उत्तरी-पश्चिमी सीमाओं की संवेदनशीलता और बढ़ी है। वेस्टर्न कमांड को नैनो ड्रोन ब्लैक हॉर्नेट भी उपलब्ध करवा दिया गया है।