पर्वतीय क्षेत्रों में वन्य जीवों के हमलों में हर वर्ष ग्रामीणों को जान गंवानी पड़ रही है। लेकिन इसके बाद भी सरकार, वन विभाग और प्रशासन वन्य जीवों को हमले को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा पाए हैं। बीते दो वर्षों में बाघ और तेंदुओं के हमले में पांच से अधिक महिलाओं की मौत होने के चलते उनके बच्चों के सिर से मां की ममता का साया उठ चुका है।
शुक्रवार को भी धारी के दीनी तल्ली के तोक धुरा में हेमा देवी की मौत के बाद से उनके तीन बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। बच्चों को रोता देख ग्रामीणों की भी आंखें भर आईं। ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग और सरकार ने पर्वतीय क्षेत्रों में वन्य जीवों के हमले रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाए तो भविष्य में और जनहानि हो सकती है।
पूर्व में भी हो चुकी है मौतें
1- 10 दिंसबर 2023 को बाघ के हमले से भीमताल ब्लॉक की ग्राम पंचायत पिनरों के तोक डोब गांव में पुष्पा देवी की मौत।
2- वर्ष 2023 में भीमताल ब्लॉक की ग्राम पंचायत मलुवाताल के कसाइल में बाघ के हमले से इंद्रा देवी की मौत।
3- वर्ष 2023 में भीमताल ब्लॉक की ग्राम पंचायत अलचौना के ताड़ा गांव में बाघ के हमले से निकिता शर्मा की मौत।
4- वर्ष 2024 में नौकुचियाताल के सिलौटी में बाघ के हमले से लीला देवी की मौत।
5- वर्ष 2025 में बेतालघाट के ओखलढूंगा में बाघ के हमले से शांति देवी की मौत।
6- वर्ष 2025 में पहाड़पानी में हेमा देवी की तेंदुए के हमले में मौत।
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