भास्कर न्यूज | पोलमी ग्राम भेड़ागढ़ में पांच दिवसीय श्रीकृष्ण लीला महोत्सव का आयोजन किया गया। यह लीला महोत्सव पूरी तरह श्रीकृष्ण के जीवन प्रसंगों पर केंद्रित रहा। मंच पर एक-एक कर जब द्वापर युग के दृश्य जीवंत हुए तो श्रद्धालु भावुक हो उठे। श्रीकृष्ण जन्म से लेकर कंस वध तक की लीलाओं का प्रभावशाली मंचन हुआ। इसे देखने दूर- दराज से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। महोत्सव की शुरुआत श्रीकृष्ण जन्म प्रसंग से हुई। कारागार का दृश्य, देवकी-वासुदेव की व्यथा और आधी रात को अवतरित होते नन्हे कृष्ण का सजीव चित्रण दर्शकों को भावुक कर गया। वासुदेव द्वारा टोकरी में बालकृष्ण को लेकर यमुना पार करने का दृश्य विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। जैसे ही मंच पर यमुना का मार्ग प्रशस्त होता दिखाया गया, श्रद्धालुओं ने तालियों से स्वागत किया। दूसरे दिन गोकुल की बाल लीलाओं ने सभी का मन मोह लिया। माखन चोरी के प्रसंग में बाल कलाकारों ने चंचलता और मासूमियत का समावेश किया। यशोदा मैया और नटखट कृष्ण के संवादों ने पारिवारिक स्नेह और वात्सल्य का संदेश दिया। मैया मोरी, मैं नहीं माखन खायो.. जैसे भजनों पर पूरा पंडाल झूम उठा। श्रद्धालुओं ने जयकारे लगाए। कालिया नाग दमन का दृश्य महोत्सव का सबसे रोमांचक प्रसंग साबित हुआ। मंच सज्जा और प्रकाश व्यवस्था के माध्यम से यमुना तट का वातावरण तैयार किया गया। जब श्रीकृष्ण ने कालिया नाग के फन पर नृत्य किया तो पंडाल में सन्नाटा छा गया। विजय के साथ ही दर्शकों ने खड़े होकर तालियां बजाईं। गोवर्धन पूजा और इंद्र के अहंकार के दमन का प्रसंग भी प्रभावशाली रहा। कलाकारों ने दिखाया कि कैसे श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की। रास लीला के दौरान वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। महिलाएं और युवतियां भजनों पर झूमती नजर आईं।
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