दिल्ली में सड़क, अस्पताल, स्कूल, पेंशन और अन्य सरकारी कामों में होने वाली देरी की जवाबदेही इंटीग्रेटेड फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (IFMS) से तय होगी। सभी सरकारी काम एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म से निगरानी में रहेंगे। दिल्ली सरकार इसे तैयार कराने पर 261.66 करोड़ रुपये खर्च कर रही है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई व्यय वित्त समिति की बैठक में वित्त विभाग के IFMS परियोजना प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। अब इसे लागू करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। अब तक किसी सड़क, ड्रेनेज या भवन निर्माण में देरी होने पर आम नागरिक को यह पता नहीं चल पाता था कि काम कहां और क्यों अटका है। IFMS लागू होने के बाद यह साफ दिखेगा कि किसी परियोजना के लिए कितना पैसा स्वीकृत हुआ, कितना खर्च हुआ और काम किस स्तर पर लंबित है। अगर तय समय में प्रगति नहीं हुई, तो सिस्टम अपने आप अलर्ट जारी करेगा।
सरकारी निर्माण कार्यों को अब केवल फाइलों और कागजी मंजूरी के आधार पर आगे नहीं बढ़ाया जाएगा, बल्कि जमीन पर हुए काम से जोड़ा जाएगा। ठेकेदारों और एजेंसियों को भुगतान तभी मिलेगा, जब काम तय चरण तक पूरा होगा। इससे अधूरे प्रोजेक्ट, बार-बार खुदी सड़कें और घटिया निर्माण जैसी समस्याओं पर रोक लगने की उम्मीद है।
कर्मचारियों को भी फायदा
पेंशनधारकों और सरकारी कर्मचारियों को भी आईएफएमएस से फायदा है। पेंशन, वेतन, जीपीएफ और अन्य भुगतानों की स्थिति सिस्टम में दर्ज रहेगी। भुगतान में देरी होने पर उसका कारण पता चल जाएगा। बुजुर्ग पेंशनरों को बार-बार दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
परियोजनाओं की होगी निगरानी
स्कूल, अस्पताल, सड़क, फ्लाईओवर और अन्य योजनाओं के बजट और खर्च की निगरानी एक साथ की जा सकेगी। ये साफ रहेगा कि किस योजना में काम रुका और कहां तेजी से प्रगति हुई।
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