आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से हरियाणा सरकार के 590 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने सोमवार देर शाम सेक्टर 32 ब्रांच की डीलिंग हेड प्रियंका और पूर्व डीलिंग हेड अनुज काैशल को गिरफ्तार कर लिया। दोनों से लंबी पूछताछ के बाद यह कार्रवाई की गई है।
सूत्रों के अनुसार, दोनों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। बैंक में भुगतान से पहले हस्ताक्षरों के सत्यापन और अनुमोदन की जिम्मेदारी इन्हीं पर थी। जांच के दौरान इसी प्रक्रिया में गड़बड़ी सामने आई है। बताया जा रहा है कि महिला कर्मचारी चंडीगढ़ स्थित बैंक शाखा में तैनात है, जबकि दूसरा कर्मचारी अब बैंक की सेवा में नहीं है। इस मामले में आईएएस अधिकारी डीके बेहरा के फर्जी हस्ताक्षरों का इस्तेमाल कर सरकारी राशि का गबन किया गया था। जांच में दोनों की संदिग्ध भूमिका सामने आने के बाद उन्हें हिरासत में लिया गया है।
दो दिन से तीन अधिकारियों से पूछताछ जारी
एसीबी इस मामले में दो सरकारी विभागों और बैंक से जुड़े तीन अधिकारियों व कर्मचारियों से पिछले दो दिनों से लगातार पूछताछ कर रही है। इसी दौरान दोनों संदिग्धों को हिरासत में लिया गया। एसीबी ने रिमांड के दौरान आईडीएफसी बैंक की अधिकारी स्वाति धीमान और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के रीजनल हेड अरुण शर्मा से मिली जानकारी के आधार पर भी संदिग्धों से पूछताछ तेज कर दी है।
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