Agriculture News: पशु चिकित्सक डॉ. अनिल कुमार ने कहा कि जन्म के तुरंत बाद बकरी के बच्चे के मुंह पर लगी झिल्लियों को साफ कर सुखना चाहिए, ताकि मेमने को सांस लेने में कोई दिक्कत न हो इसके साथ ही जन्म के तुरंत बाद मेमने को मां का पहला दूध खीस जरूर पिलाना चाहिए.
डॉ अनिल कुमार ने कहा कि जन्म के तुरंत बाद बकरी के बच्चे के मुंह पर लगी झिल्लियों को साफ कर सुखना चाहिए, ताकि मेमने को सांस लेने में कोई दिक्कत न हो इसके साथ ही जन्म के तुरंत बाद मेमने को मां का पहला दूध खीस जरूर पिलाना चाहिए. बकरी का पहला दुध बच्चे के लिए बहुत ही पौष्टिक होता है. यह बच्चों को रोगों से बचाता है.वहीं मेमनों में ठंड से बचाने के लिए बाड़े को बोरी या मोटे कपड़े से ढक देना चाहिए, ताकि ठंडी हवा सीधे अंदर न आए इसके अलावा बकरियों के बैठने के लिए बिछावन की व्यवस्था जरूरी है, जिससे मेमना ठंडी फर्श के संपर्क में न आए और उसे पर्याप्त गर्मी मिल सके.
ठंड के मौसम में निमोनिया का डर
वहीं मेमनों को ठंड से सुरक्षित रखने के लिए पुरानी जूट की बोरी भी उपयोग की जा सकती है.वहीं भोजन की बात करें तो बकरियों के बच्चों को हमेशा वजन का केवल 10 प्रतिशत तक खाना ही देना चाहिए, क्योंकि अधिक भोजन देने से अपच के कारण मेमनों कि मौत भी हो सकती है. इसलिए मेमनों को संतुलित भोजन देना चाहिए और हमेशा साफ गुनगुना पानी पिलाना चाहिए. वहीं ठंड के मौसम में देखभाल की कमी के कारण बकरी के बच्चों में प्रमुख रूप से निमोनिया, हाइपोथर्मिया और संक्रमण से जुड़ी समस्याएं देखने को मिलती है.ठंड की चपेट में निमोनिया से ग्रसित बकरियों में ठंड लगना, कंपकंपाना सुस्ती, बुखार और नाक से बलगम आना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, और समय पर इलाज न होने पर हालत और गंभीर हो जाती है. ऐसे में जल्द से जल्द पशु चिकित्सक से संपर्क कर इलाज करना चाहिए.
मेमनों को हरा चारा देने से करें परहेज
वहीं सर्दियों के दौरान सफाई में कमी या भोजन में अनियमितता के कारण दस्त की समस्या सबसे अधिक होती जिससे है. बकरी पुरी तरह कमजोर हो जाती है. ऐसे में दोस्त की समस्या होने पर पशु चिकित्सक से संपर्क करना जरूरी है और दौरान मेमनों को हरा चारा देने से परहेज करना चाहिए, जबकि बकरियों को उबला दलिया और फायदेमंद रहता है.वहीं मेमनों को परजीवी रोगों से बचाने के लिए समय पर डी-वॉर्मिंग और टीकाकरण कराना भी अत्यंत आवश्यक हैं इससे वे संक्रमण से सुरक्षित रहते हैं, जल्दी बढ़ते हैं. स्वास्थ्य बेहतर बना रहता है, जिसके कारण पशुपालकों को कम समय में अच्छा आर्थिक लाभ मिलता है.
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