छोटे आयोजन भी बड़े स्तर पर मनाए जाते हैं
कई कॉलोनियों में होली मिलन समारोह, गणेश उत्सव, गरबा नाइट और दीपावली मिलन जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन आयोजनों से न केवल आपसी दूरी कम हो रही है बल्कि सामाजिकता की भावना भी विकसित हो रही है।
कई सामाजिक संगठनों ने मनाया होली समारोह
इस होली कुर्मांचल संस्कृति, बद्री-केदार समिति, ओएनजीसी ऑफिसर्स, अग्रवाल महासभा, वैश्य अग्रवाल राजवंश सभा समेत कई महिला संगठन और शैक्षणिक संस्थानों में होली मिलन समारोह का आयोजन किया गया।
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– पहले हम अपने घरों तक ही सीमित रहते थे। अब त्योहारों पर पूरी सोसायटी एक साथ मिलकर सभी त्योहारों की खुशी मनाते हैं। इससे न केवल अपनापन बढ़ता है बल्कि ज्यादा लोगों के साथ त्योहारों का मजा भी बढ़ जाता है। – शोभा थपलियाल
– गांव में जैसे सब मिलकर त्योहार मनाते हैं वैसा माहौल अब शहर में भी बनने लगा है। इससे बच्चों को भी सबसे घुलने-मिलने और हमारी संस्कृति को समझने का मौका मिल रहा है। – अमन गुप्ता
– कॉर्पोरेट लाइफ में समय कम मिलता है लेकिन अब सोसायटी में सामूहिक कार्यक्रम होते हैं तो मानसिक तनाव भी कम होता है और पड़ोसियों से अच्छी दोस्ती हो जाती है। – प्रिया
– अब ज्यादातर लोगों के एकल परिवार हैं। लोग आपस में ही जश्न मना लेते थे। इससे त्योहारों पर उतना मजा नहीं आता था। अब सबके साथ हर त्योहारों की रौनक बढ़ जाती है। – दीपक
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