हिमाचल हाईकोर्ट में पंचायत चुनाव पर सुनवाई।
हिमाचल हाईकोर्ट में पंचायत चुनाव समय पर करवाने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका (PIL) पर आज सुनवाई होगी। बीते शुक्रवार को भी इस मामले अदालत में दो घंटे से अधिक समय तक बहस हुई। अब इस मामले को फिर सुना जाएगा।
प्रदेशवासियों की नजरे कोर्ट के फैसले पर टिकी है, क्योंकि राज्य सरकार अभी आपदा का हवाला देकर चुनाव नहीं कराना चाह रही, जबकि स्टेट इलेक्शन कमीशन दिसंबर 2025 में ही चुनाव चुनाव कराने की तैयारियां कर चुका था।
इस मामले में एडवोकेट मंदीप चंदेल ने हाईकोर्ट में PIL डाल रखी है। उन्होंने अदालत से चुनाव समय पर कराने की मांग की है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि डिजास्टर ग्राउंड की आड़ पर अनिश्चितकाल तक चुनाव नहीं टाले जा सकते।
वहीं मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने बीते 8 अक्टूबर को डिजास्टर एक्ट का हवाला देते हुए आपदा से हालात सामान्य होने के बाद पंचायत चुनाव कराने की बात कही है। इसके बाद, कैबिनेट ने भी चुनाव की घोषणा से कुछ दिन पहले पंचायतों के पुनर्गठन का फैसला लिया है। यदि पंचायतों का पुनर्गठन किया जाता है, तो इस प्रक्रिया में दो से ढाई महीने का वक्त लगेगा। इससे मार्च-अप्रैल से पहले चुनाव नहीं हो पाएंगे।
संविधान के अनुच्छेद 243-ई के अनुपालन का आग्रह
याचिका में कहा गया कि हिमाचल में पिछली पंचायत चुनाव प्रक्रिया दिसंबर 2020 से जनवरी 2021 के बीच तीन चरणों में हुई थी। संविधान के अनुच्छेद 243-ई के मुताबिक हर पंचायत का कार्यकाल 5 साल से ज्यादा नहीं हो सकता और मौजूदा जन प्रतिनिधियों का कार्यकाल खत्म होने से पहले ही चुनाव करवाना जरूरी है। मगर अब तक इलेक्शन कमीशन ने चुनाव का कार्यक्रम जारी नहीं किया और न ही तैयारी की है।
संविधान और कानून का हवाला
याचिका में संविधान के अनुच्छेद 243-ई और 243-के के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धाराओं 120 और 160 का उल्लेख किया गया है। इन प्रावधानों में कहा गया है कि हर पंचायत का कार्यकाल 5 साल से ज्यादा नहीं होगा।
स्टेट इलेक्शन कमीशन पर यह जिम्मेदारी है कि वह पंचायतों के चुनाव समय पर करवाएं। सरकार किसी भी स्थिति में चुनाव को टाल नहीं सकती, जब तक कोई असाधारण परिस्थिति जैसे प्राकृतिक आपदा या गंभीर कानून-व्यवस्था की समस्या न हो।
चुनाव न होने से लोकतांत्रिक शासन की जड़ें कमजोर होंगी
याचिकाकर्ता का कहना है कि यह याचिका किसी राजनीतिक या निजी स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि जनहित में दायर की गई है। अगर समय पर चुनाव नहीं हुए, तो राज्य में पंचायत राज संस्थाएं अपनी वैधानिक स्थिति खो देंगी और लोकतांत्रिक शासन की जड़ें कमजोर होंगी।
31 जनवरी को पूरा हो रहा कार्यकाल
हिमाचल की 3577 पंचायतों और 71 नगर निकायों में इसी साल चुनाव होने हैं। मौजूदा प्रतिनिधियों का कार्यकाल 31 जनवरी 2026 को पूरा हो रहा है। इलेक्शन कमीशन को इससे पहले हर हाल में चुनाव कराना है, यह संवैधानिक बाध्यता भी है। मगर जिस तरह के हालात बन रहे हैं, उसे देखते हुए ये चुनाव समय पर होते नजर नहीं आ रहे हैं।
पंचायतों में यह चुनाव पांच पदों (प्रधान, उप प्रधान, वार्ड मेंबर, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य) के लिए होने हैं, जबकि शहरी निकाय में वार्ड पार्षद के लिए वोटिंग होनी है। इसी तरह 71 नगर निकायों में पार्षद चुने जाएंगे।
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