रायपुर से लगे आरंग क्षेत्र के ग्राम निसदा में चल रहे अवैध उत्खनन पर हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने लीज एरिया के बाहर हो रहे उत्खनन पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने खनिज विभाग के सचिव को व्यक्तिगत रूप से शपथ पत्र (अफिडेविट) पेश करने का आदेश दिया है। जानकारी के मुताबिक, अवैध उत्खनन से 400 एकड़ कृषि भूमि बंजर हो गई। फिलहाल, मामले की अगली सुनवाई 26 फरवरी को होगी। जानिए क्या है पूरा मामला ? दरअसल, आरंग के ग्राम निसदा के रहने वाले ओम प्रकाश सेन ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। याचिका में बताया गया कि गांव में फ्लैग स्टोन और चूना पत्थर के उत्खनन के लिए 15 लोगों को लीज दी गई थी। लेकिन लीजधारकों ने स्वीकृत क्षेत्र से करीब पांच गुना अधिक जमीन पर अवैध कब्जा कर उत्खनन शुरू कर दिया। आरोप है कि खनन के दौरान निकलने वाला माइनिंग वेस्ट और पत्थर सीधे महानदी में डंप किए जा रहे हैं। इससे नदी का प्रवाह प्रभावित हो रहा है और आसपास की लगभग 400 एकड़ कृषि भूमि बंजर होने की स्थिति में पहुंच गई है। पर्यावरणीय क्लीयरेंस खत्म, फिर हो रही ब्लास्टिंग याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि तीन साल पहले पर्यावरणीय अनुमति (Environmental Clearance) समाप्त हो चुकी है, इसके बावजूद क्षेत्र में बेखौफ उत्खनन और धड़ल्ले से ब्लास्टिंग की जा रही है। राज्य सरकार का जवाब- 30 करोड़ का नोटिस जारी सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से बताया गया कि कलेक्टर ने खनिज विभाग से जांच कराई थी। जांच में सात लीजधारकों को दोषी पाया गया। इसके बाद पर्यावरणीय अनुमति खत्म होने के बावजूद उत्खनन करने वाले सात दोषी लीजधारकों पर 30 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाने का नोटिस जारी किया गया है। हाईकोर्ट ने पूछा- नदी में कचरा फेंकने वालों पर क्या कार्रवाई हुई? हाईकोर्ट ने खनिज विभाग के सचिव को शपथ पत्र के माध्यम से यह बताने को कहा है कि वर्तमान में जांच की स्थिति क्या है। महानदी में माइनिंग वेस्ट और पत्थर फेंकने वालों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया है कि यदि कोई लीजधारक इस कार्रवाई के खिलाफ अलग से याचिका दाखिल करता है, तो उसे भी इसी जनहित याचिका के साथ जोड़कर सुना जाएगा।
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.