Last Updated:
Poultry Farming Tips For Summers: गर्मी बढ़ने पर मुर्गी पालन करने वालों को मुर्गियों का विशेष ध्यान रखना चाहिए वरना मौसम की मार का ये भी शिकार हो सकते हैं. इस समय कैसा खाना-पानी देना चाहिए, रहने की क्या व्यवस्था होनी चाहिए, जानते हैं एक्सपर्ट से.
देवघर. गर्मियों का मौसम दस्तक दे चुका है और तापमान में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है. ऐसे में मुर्गी पालन करने वाले किसानों की चिंता भी बढ़ने लगी है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इस मौसम में सावधानी नहीं बरती गई तो मुर्गियों की सेहत पर सीधा असर पड़ सकता है, जिससे अंडा उत्पादन और वजन वृद्धि दोनों प्रभावित हो सकते हैं. इसलिए समय रहते उचित प्रबंधन अपनाना बेहद जरूरी है.
मुर्गी पालन विशेषज्ञों के अनुसार, गर्मी के मौसम में सबसे ज्यादा ध्यान पानी की व्यवस्था पर देना चाहिए. आइए जानते हैं मुर्गी विशेषज्ञ संदीप कुमार राय से कि किन व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है.
24 घंटे ठंडे पानी की रखें व्यवस्था
मुर्गी विशेषज्ञ संदीप कुमार राय बताते हैं कि तापमान बढ़ने के साथ मुर्गियों की पानी पीने की मात्रा लगभग दोगुनी हो जाती है. ऐसे में उन्हें 24 घंटे साफ और ठंडा पानी उपलब्ध कराना अनिवार्य है. पानी के बर्तनों की संख्या 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ा देने की सलाह दी जाती है, ताकि सभी पक्षियों को आसानी से पानी मिल सके. दिन में कम से कम चार बार पानी बदलना चाहिए. साथ ही पानी में इलेक्ट्रोलाइट्स और विटामिन-सी मिलाने से शरीर में पानी की कमी नहीं होती और हीट स्ट्रेस का खतरा कम होता है. बिना पशु चिकित्सक की सलाह के एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग नहीं करना चाहिए.
शेड का तापमान रखें नियंत्रित
विशेषज्ञ बताते हैं कि शेड का तापमान नियंत्रित रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है. शेड की छत पर जूट की बोरियां, पुआल या टाट बिछाकर उन पर समय-समय पर पानी का छिड़काव करने से अंदर का तापमान कम किया जा सकता है. इसके अलावा पंखे, कूलर या मिस्टिंग सिस्टम का इस्तेमाल करने से भी गर्मी का असर घटाया जा सकता है. शेड में क्रॉस वेंटिलेशन की उचित व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि गर्म हवा और अमोनिया जैसी हानिकारक गैसें बाहर निकल सकें.
गर्मी के दिनों में मुर्गियों की संख्या में रखें संतुलन
गर्मी के दौरान भीड़भाड़ कम रखना भी जरूरी है. सामान्य दिनों की तुलना में मुर्गियों को 10 से 15 प्रतिशत अधिक जगह देने की सलाह दी जाती है. ज्यादा भीड़ होने पर तनाव बढ़ता है, जिससे बीमारी फैलने का खतरा बढ़ जाता है और उत्पादन में गिरावट आ सकती है. बिछावन की मोटाई दो इंच से अधिक नहीं होनी चाहिए और उसे दिन में दो से तीन बार पलटते रहना चाहिए, ताकि नमी और बदबू जमा न हो.
गर्मी के दिनों में संतुलित आहार दें
भोजन प्रबंधन में भी बदलाव करना आवश्यक है. मुर्गी विशेषज्ञ संदीप कुमार राय का कहना है कि दिन के सबसे गर्म समय में दाना नहीं देना चाहिए. मुर्गियों को सुबह जल्दी या शाम के समय ही आहार देना बेहतर होता है. दाने में प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स की मात्रा संतुलित रूप से बढ़ाई जा सकती है, लेकिन ऊर्जा की मात्रा अधिक नहीं रखनी चाहिए, क्योंकि ज्यादा ऊर्जा शरीर में अतिरिक्त गर्मी पैदा करती है.
मुर्गियों को सीधे धूप से बचाया जाए और दोपहर के समय उन्हें अनावश्यक रूप से परेशान न किया जाए. कम तनाव और बेहतर प्रबंधन से ही गर्मी के मौसम में उत्पादन को स्थिर रखा जा सकता है. सही देखभाल अपनाकर किसान इस चुनौतीपूर्ण मौसम में भी नुकसान से बच सकते हैं और अपने व्यवसाय को सुरक्षित रख सकते हैं.
About the Author
बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.