फैंटम पेन की कहानी
डॉ. मांडलिक ने एक मरीज का उदाहरण दिया जिसका एक्सिडेंट होने के कारण उसका बायां पैर सर्जरी के द्वारा काटकर अलग कर दिया गया था. अब उसका बांया पैर नहीं था लेकिन मरीज ने बताया कि पैर अलग होने के बावजूद उसे लगातार बाएं पैर में दर्द का अहसास होता है. मेडिकल साइंस में इस स्थिति के लिए इलाज संभव नहीं है, क्योंकि वह अंग तो पहले ही अलग किया जा चुका है.
तब डॉ. मांडलिक ने इस मरीज की स्थिति को समझते हुए उसके लिए योग निद्रा डिजाइन की और उसे इसका अभ्यास कराया. अभ्यास के बाद उन्होंने मरीज की स्थिति पूछी तो उसने बताया कि जितनी देर योग निद्रा करता है, उतनी देर दर्द ठीक रहता है, उसके बाद फिर होने लगता है. डॉ. मांडलिक ने इस मरीज को नियमित रूप से योग निद्रा का अभ्यास कराया और करीब दो महीने बाद उसका दर्द पूरी तरह से ठीक हो गया.
डिलिवरी के दर्द से घबराती थी महिला
‘एक गर्भवती महिला मेरे पास अपनी समस्या लेकर आई. उसे डिलीवरी और उससे जुड़े महिलाओं के अनुभव सुनकर काफी तनाव हो गया था और इस कारण उसका बीपी अधिक रहता था. तब मैंने उसके लिए गर्भावस्था को ध्यान में रखते हुए योग निद्रा डिजाइन कर उसका अभ्यास कराया तो इसका महिला पर सकारात्मक प्रभाव हुआ. उसका तनाव दूर हो गया, बीपी सामान्य हो गया और डिलीवरी भी नॉर्मल हो गई.’
दो भाइयों के मोटापे की कहानी
मोटापे के शिकार दो भाइयों ने अपने मोटापे की समस्या को लेकर संपर्क किया. एक का वजन 137 किलो और दूसरे का 157 किलो था. इन दोनों ने प्राकृतिक तरीकों से वजन घटाने का अभ्यास शुरू किया. 137 किलो वजन वाले व्यक्ति का वजन लगभग 8-10 किलो कम हो गया, लेकिन दूसरे का वजन बिल्कुल भी नहीं घटा. जब मैंने इसकी जांच की तो पाया कि दूसरे भाई को अपने वजन घटाने को लेकर खुद पर यकीन नहीं था. उसे लगता था कि वह कुछ भी कर ले, वजन नहीं घटेगा. उसकी इस सोच को बदलने के लिए कस्टमाइज्ड योग निद्रा कराई, जिसमें उसे यकीन दिलाया गया कि इस अभ्यास से उसका वजन घटेगा. इसका प्रभाव यह हुआ कि दूसरे भाई की तरह उसका वजन भी घटकर सामान्य अवस्था में आ गया.
क्या है योग निद्रा?
योग निद्रा को लेकर डॉ. मांडलिक ने बताया कि स्वामी सत्यानंद सरस्वती ने इसे 50-60 वर्ष पहले दिया था, जिससे अब तक देश-विदेश के बहुसंख्यक लोग लाभान्वित हो चुके हैं. योग निद्रा एक तुरीय अवस्था है, जो नींद और जागृत अवस्था के बीच की अवस्था है. यह गहन ध्यान की अवस्था है.
सबसे खास बात है कि योग निद्रा तीन स्तरों पर काम करता है, पहला जागृत अवस्था, दूसरा अर्ध जागृत और तीसरा सुप्त अवस्था. मस्तिष्क की सभी इंद्रियां बहुत संवेदनशील होती हैं, जिसके आधार पर नर्वस सिस्टम बहुत तेजी से काम करता है. दिमाग के भीतर जो भी सूचनाएं होती हैं, उसके आधार पर अपने आसपास होने वाले क्रियाकलापों को समझता है. इंसान की गतिविधियां उसकी स्मृतियों पर निर्भर करती हैं. अगर दिमाग में किसी आघात या दर्द से जुड़ी स्मृतियां हैं, तो वह उसके वर्तमान को प्रभावित करती हैं. योग निद्रा के अभ्यास के द्वारा इन्हीं नकारात्मक स्मृतियों में बदलाव लाया जाता है और सूचना जागृत अवस्था के पार सीधे अर्ध जागृत अवस्था में पहुंच जाती है, जिससे इंसान उसे पूरी तरह से स्वीकार कर लेता है, इससे उसकी मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक स्थिति बेहतर हो जाती है.
मनोचिकित्सा के लिए रामबाण है योग निद्रा
योग निद्रा के गहन प्रभावों पर चर्चा करते हुए डॉ. मांडलिक ने बताया कि इससे तनाव और जीवनशैली से जुड़ी हुई समस्याओं जैसे कि हाइपरटेंशन, डायबिटीज, रीढ़ की हड्डी में दर्द, नींद में कमी आदि का प्रभावी तरीके से प्रबंधन किया जा सकता है. अधिकतर स्वास्थ्य समस्याएं आंशिक रूप से मन से जुड़ी हुई होती हैं और योग निद्रा व्यक्ति के मन को सकारात्मक बनाती है. इसका प्रभाव यह होता है कि व्यक्ति योग निद्रा के अभ्यास से मन से शांत और स्थिर हो जाता है, उसकी पुरानी मेमोरी को नई मेमोरी से बदला जाता है जिससे उसकी समस्याओं का भी निदान हो जाता है.
वहीं मोरारजी देसाई के निदेशक डॉ. काशीनाथ समगंडी ने भी ‘समयोग’ को अपने जीवन में आत्मसात करने का संदेश देते हुए योग और आधुनिक विज्ञान के एकीकरण की बात कही.
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