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Pahadi Shakarkand Health Benefits: उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में उगने वाली छोटी और सुनहरी शकरकंद अब केवल एक कंद नहीं, बल्कि सेहत के लिए ‘सुपरफूड’ बन चुकी है. मैदानी शकरकंद के मुकाबले अधिक मीठी और पोषक तत्वों से भरपूर यह फसल विटामिन ए, फाइबर और पोटेशियम का खजाना है. सर्दियों में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और कमजोरी दूर करने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में इसे अंगारों में भूनकर खाने की पुरानी परंपरा है. जैविक मिट्टी में तैयार होने वाली इस शकरकंद की मांग अब शहरों में भी तेजी से बढ़ रही है, जिससे स्थानीय किसानों के लिए यह अतिरिक्त आय का एक बेहतरीन जरिया साबित हो रही है.
पहाड़ी शकरकंद आम शकरकंद की तुलना में आकार में छोटी होती है, लेकिन स्वाद में ज्यादा मीठी और गाढ़ी होती है. पहाड़ की ठंडी जलवायु और जैविक मिट्टी में उगने के कारण इसमें प्राकृतिक शर्करा अधिक विकसित होती है. यही वजह है कि इसे पकाने के बाद इसका स्वाद और भी निखर जाता है. स्थानीय लोग बताते हैं कि अंगारों में भूनने पर इसकी खुशबू दूर तक फैलती है. बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी इसे पसंद करते हैं.

यह शकरकंद विटामिन ए, फाइबर और पोटेशियम से भरपूर होती है. विटामिन ए आंखों की रोशनी के लिए फायदेमंद माना जाता है, जबकि फाइबर पाचन तंत्र को मजबूत करता है. पोटेशियम शरीर में इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखने में मदद करता है. नियमित सेवन से शरीर को ऊर्जा मिलती है और कमजोरी दूर होती है. आयुर्वेद में भी इसे ताकत बढ़ाने वाला कंद बताया गया है.

सर्दियों में अक्सर सर्दी-खांसी की समस्या बढ़ जाती है. ऐसे में पहाड़ी शकरकंद शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मददगार मानी जाती है. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट तत्व शरीर को संक्रमण से बचाने में सहायक होते हैं. ग्रामीण इलाकों में इसे ठंड से बचाव के लिए पारंपरिक आहार के रूप में खाया जाता है.
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पहाड़ी शकरकंद का छिलका सफेद, लाल या बैंगनी रंग का हो सकता है, जबकि अंदर का गूदा पीला या नारंगी होता है. रंग के आधार पर इसके स्वाद में हल्का फर्क देखने को मिलता है. बैंगनी गूदे वाली शकरकंद में एंटीऑक्सीडेंट की मात्रा अधिक मानी जाती है, जो शरीर के लिए लाभकारी है.

ग्रामीण क्षेत्रों में इसे अंगारों में भूनकर या उबालकर खाया जाता है. ऊपर से नींबू और चाट मसाला डालने पर इसका स्वाद और बढ़ जाता है. मेले और हाट बाजारों में सर्दियों के दौरान भुनी हुई शकरकंद आसानी से मिल जाती है. इसका देसी अंदाज लोगों को खास आकर्षित करता है. भुनी हुई शकरकंद खाने में बेहद ही स्वादिष्ट होती है

व्रत और उपवास के दौरान पहाड़ी शकरकंद से कई तरह की फराली डिश बनाई जाती हैं. इससे हलवा, टिक्की और चिप्स तैयार किए जाते हैं. कम तेल में बनने के कारण यह हल्का और सुपाच्य माना जाता है. त्योहारों में यह ऊर्जा देने वाला भोजन साबित होता है. व्रत में इसका भगवान को भी भोग लगाया जाता है. इसे शुद्ध भोजन माना जाता है.

पहाड़ी क्षेत्रों में शकरकंद की खेती किसानों के लिए अतिरिक्त आय का जरिया बन रही है. कम लागत और कम पानी में तैयार होने वाली यह फसल स्थानीय बाजारों में अच्छे दाम पर बिकती है. जैविक तरीके से उगाई गई शकरकंद की मांग शहरों में भी बढ़ रही है. इसलिए शहरों के लोग भी इसे मंगा रहे हैं, और इसका स्वाद चख रहे हैं.

सर्दियों के मौसम में पहाड़ी शकरकंद स्वाद और पोषण दोनों का संतुलन देती है. यह प्राकृतिक रूप से मीठी होने के कारण बच्चों को भी पसंद आती है. सेहतमंद विकल्प के रूप में इसे डाइट में शामिल करना फायदेमंद माना जाता है. यही कारण है कि बागेश्वर की यह खास शकरकंद अब लोगों के बीच सुपरफूड के रूप में पहचान बना रही है.
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