ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया एक ऐसी स्थिति है, जिसमें व्यक्ति के सोते समय बार-बार सांस रुक जाती है. यह समस्या तब पैदा होती है जब नींद के दौरान गले की मांसपेशियां ढीली पड़ जाती हैं और वायुमार्ग आंशिक या पूरी तरह से बंद हो जाता है. इसके कारण फेफड़ों तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती. जब ऑक्सीजन का स्तर गिरता है, तो शरीर खुद को बचाने के लिए अचानक नींद से जगा देता है. इसी दौरान व्यक्ति को घुटन, दबाव या किसी के गला दबाने जैसा एहसास हो सकता है.
शरीर का वजन बढ़ना है मुख्य वजह
नैनीताल के बीडी पांडे जिला अस्पताल के चेस्ट रोग विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक गुप्ता बताते हैं कि इस समस्या को लेकर लोगों में कई गलतफहमियां हैं. उन्होंने बताया कि, अक्सर मरीज बताते हैं कि उन्हें नींद में ऐसा लगता है जैसे किसी ने दबा दिया हो, लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं होता. इसका मुख्य कारण शरीर का वजन बढ़ना और गर्दन के आसपास फैट का जमा होना है. सोते समय जीभ पीछे की ओर खिसक जाती है और श्वसन नली को आंशिक या पूरी तरह ब्लॉक कर देती है. डॉ. गुप्ता बताते हैं कि जब श्वसन नली बंद होती है, तो शरीर में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ जाती है और ऑक्सीजन का स्तर कम हो जाता है. यही स्थिति शरीर के लिए खतरे का संकेत होती है, जिससे अचानक नींद खुल जाती है. इस दौरान व्यक्ति को तेज धड़कन, पसीना, घबराहट और गला दबने जैसा अहसास होता है. अगर यह स्थिति बार-बार हो रही है, तो इसे हल्के में लेना खतरनाक साबित हो सकता है.
कई बड़ी समस्याओं का कारण बन सकती है बीमारी
ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया के सामान्य लक्षणों में तेज और लगातार खर्राटे, नींद के दौरान सांस रुकने की शिकायत, सुबह उठते ही सिरदर्द, दिनभर थकान, नींद पूरी होने के बावजूद सुस्ती, चिड़चिड़ापन और ध्यान केंद्रित करने में परेशानी शामिल हैं. कई मामलों में मरीज को खुद पता नहीं चलता कि उसकी नींद के दौरान सांस रुक रही है, बल्कि परिवार के सदस्य को इसकी जानकारी देते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इस बीमारी का समय पर इलाज न कराया जाए, तो यह हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक, स्ट्रोक, डायबिटीज और दिल की धड़कन से जुड़ी समस्याओं का कारण बन सकती है. लंबे समय तक ऑक्सीजन की कमी दिल और दिमाग पर सीधा असर डालती है, जिससे जान का खतरा भी बढ़ सकता है.
नियमित एक्सरसाइज और संतुलित खानपान जरूरी
डॉ. गुप्ता बताते हैं कि उम्र और जीवनशैली भी इस बीमारी में अहम भूमिका निभाती है. आमतौर पर पुरुषों में यह समस्या 50 साल के बाद ज्यादा देखी जाती है, जबकि महिलाओं में 40 साल की उम्र के बाद इसका खतरा बढ़ जाता है. मोटापा, धूम्रपान, शराब का सेवन और शारीरिक गतिविधि की कमी इस बीमारी के जोखिम को और बढ़ा देते हैं. इससे बचाव और नियंत्रण के लिए डॉक्टर कुछ जरूरी सावधानियों पर जोर देते हैं. इनमें नियमित एक्सरसाइज, वजन और शरीर के फैट को नियंत्रित रखना, संतुलित और हेल्दी भोजन करना, सोने से पहले भारी खाना या शराब से परहेज करना और सही सोने की मुद्रा अपनाना शामिल है. गंभीर मामलों में डॉक्टर की सलाह पर विशेष जांच और इलाज भी जरूरी हो सकता है. उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति को बार-बार नींद में घुटन, सांस रुकने या शरीर जकड़ने जैसा अनुभव हो रहा है, तो उसे इसे डर या वहम समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, बल्कि तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. समय पर पहचान और सही इलाज से ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया जैसी गंभीर बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है और भविष्य में होने वाले बड़े स्वास्थ्य जोखिमों से बचा जा सकता है.
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