Goat Milk Benefits: स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. आर.पी. परौहा ने बताया कि बकरी का दूध बेहद फायदेमंद होता है. इसमें मौजूद खनिज लवण और कम फैट दिल के मरीजों, डायबिटीज और किडनी से जुड़ी समस्याओं में राहत देते हैं. सर्दियों में इसका सेवन शरीर को गर्म रखता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है.
स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. आर.पी. परौहा ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि बकरी के दूध में मौजूद फैट ग्लोब्यूल्स आकार में बहुत छोटे होते हैं. यही कारण है कि यह दूध तेजी से पचता है और गैस, एसिडिटी व अपच से परेशान लोगों के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. इसमें कैसिन नामक प्रोटीन कम मात्रा में होता है, जो अक्सर दूध एलर्जी और पाचन में दिक्कत की वजह बनता है.
डॉ. परौहा के मुताबिक़, बकरी का दूध इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए एक प्राकृतिक दवा जैसा है. इसमें मौजूद सेलेनियम, जिंक और एंटीऑक्सीडेंट तत्व शरीर को बैक्टीरिया और वायरस से लड़ने की क्षमता देते हैं. नियमित सेवन से सर्दी-जुकाम, मौसमी बुखार और इंफेक्शन का खतरा काफी कम हो जाता है. हड्डियों के लिए भी यह दूध किसी रामबाण से कम नहीं. इसमें कैल्शियम, फॉस्फोरस और विटामिन डी की उच्च मात्रा होती है, जो बच्चों में ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्या को रोकने में मददगार है. वहीं, हार्ट मरीजों के लिए भी यह लाभकारी है क्योंकि इसमें कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम पाया जाता है. मैग्नीशियम और पोटैशियम ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखते हैं, जबकि आयरन और विटामिन B12 हीमोग्लोबिन बढ़ाने में कारगर हैं.
सिर्फ स्वास्थ्य ही नहीं, बकरी का दूध ब्यूटी के लिए भी वरदान है. डॉ. परौहा बताते हैं कि इसमें मौजूद लैक्टिक एसिड त्वचा को नमी देता है और उसे मुलायम बनाता है. यही वजह है कि कई ब्यूटी प्रोडक्ट्स और आयुर्वेदिक साबुन में बकरी के दूध उपयोग किया जाता है. डॉक्टर ने बताया कि जन्म के बाद बच्चे के लिए मां का दूध सर्वोत्तम है. लेकिन अगर किसी स्थिति में मां का दूध नहीं मिल पाता, तो बकरी का दूध सबसे सुरक्षित और सबसे आसान माना जाता है. हालांकि डॉक्टर की सलाह है कि यह दूध उन्हीं बकरियों का होना चाहिए जो जंगल में चरती हैं और प्राकृतिक पत्तियां खाती हैं। बाजार से मिला पैकेट वाला दूध बच्चों के लिए कभी भी सही विकल्प नहीं.
डॉक्टर ने बताया कि गाय के दूध में आयरन कम होता है, इसलिए छोटे बच्चों को दूध देने से पहले उसमें थोड़ा गुड़ मिलाया जा सकता है. हालांकि ज्यादा गुड़ देने से पेट में कीड़े लगने का खतरा रहता है. ऐसे में पलाश के बीज का प्रयोग एक प्राकृतिक उपचार है. इसे पीसकर शहद में मिलाकर रोजाना थोड़ा सा देने से बच्चों के पेट के कीड़े समाप्त हो जाते हैं और पाचन तंत्र मजबूत होता है.
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Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
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