एम्स,आरपी सेंटर के पूर्व चीफ डॉक्टर जीवन एस तितियाल का कहना है कि प्रदूषण और खराब हवा का असर आंखों पर पड़ता है. इसके साथ ही फोन या लैपटॉप की स्क्रीन लंबे समय तक देखने से भी आंखों को नुकसान पहुंच रहा है और लोगों में ड्राई आईज की परेशानी देखने को मिल रही है. हालांकि इस परेशानी को आप घर पर रहकर भी ठीक कर सकते हैं.
आंखों की ये दवाएं स्टेरॉइड फ्री होती हैं, और इन्हें डालने से कई परेशानियों में राहत मिल सकती है.
डॉ तितियाल बताते हैं, ‘आंखों की जलन, खुजली, पानी आना, लालिमा या ड्राई आईज की परेशानी को दूर करने के लिए आप बाजार से स्टेरॉइड फ्री आई ड्रॉप्स ले सकते हैं और इन्हें दिन में 3 से 4 बार आंखों में डाल सकते हैं. आप बाजार से ओब्लिक लुब्रिकेटिंग ड्रॉप्स खरीद सकते हैं. ये स्टेरॉइड फ्री दवा है. इससे आपको आराम मिलेगा. दूसरी दवा सोडियम हाइल्यूरोनेट आई ड्रॉप हीै यह भी आंखों की पॉल्यूशन वाली एलर्जी और ड्राई आईज में आराम देती है. तीसरी दवा है आर्टिफिशियल टियर्स यानि सीएमसी ड्रॉप्स. ये सभी सॉल्ट के नाम हैं, इनके ब्रांड नेम अलग-अलग हो सकते हैं. ये सॉल्ट सस्ती जेनरिक दवाओं में भी जन औषधि केंद्रों पर भी उपलब्ध होते हैं. ऐसे में इन्हें आप ले सकते हैं और जब तक दिल्ली -एनसीआर में प्रदूषण है, तब तक दो-3 महीने तक आप इन्हें लगातार डाल सकते हैं.’
आई ड्रॉप के इस्तेमाल में ध्यान रखें ये बातें
डॉ. तितियाल कहते हैं कि ध्यान रहे यहां बताई जा रही कोई भी आई ड्रॉप को एक बार खोलने के बाद सिर्फ एक महीने के अंदर ही इस्तेमाल करना है. साथ ही इस्तेमाल के बाद इस आई ड्रॉप को रेफ्रिजरेटर में 4 डिग्री सेंटीग्रेट के तापमान पर रखें. अगर आप पहले से आंखों की कोई दवा डाल रहे हैं तो यहां बताई गई दवाएं आप अपनी पुरानी बीमारी वाली आई ड्रॉप से आधा घंटा पहले या आधा घंटा बाद में डाल सकते हैं.

ये आई ड्रॉप्स जेनरिक दवाओं के रूप में जन औषधि केंद्रों से भी सस्ते दामों में खरीद सकते हैं.
दवा को आंख में डालने से पहले हाथों को साफ रखें, चेहरा भी धोएं. जब भी आप घर से बाहर निकलें या वॉक पर जाएं तो ड्रॉप डाल लें. ऑफिस में काम शुरू करने से पहले ड्रॉप डाल सकते हैं. घर से बाहर निकलें तो गॉगल्स जरूर पहनें. यह दवा हर 6 घंटे के गैप पर डाली जा सकती है और स्वस्थ आंखों में भी डाली जा सकती है.
प्रदूषण में बहुत जरूरी है आंखों की देखभाल
डॉक्टर कहते हैं कि प्रदूषण में आंखों की देखभाल बहुत जरूरी है. एक बार आंख में परेशानी शुरू हुई तो वह गंभीर बीमारी तक बन सकती है. इसलिए जैसे ही आंखों में जलन, खुजली, पानी आना या लालिमा जैसे लक्षण दिखें तो आप ये स्टेरॉइड फ्री सॉल्ट वाली दवाएं ले सकते हैं, या जब तक प्रदूषण है तब तक एहतियातन भी डाल सकते हैं. सिर्फ प्रदूषण ही नहीं अगर आप ऑफिस में काम करते हैं, स्क्रीन टाइम ज्यादा है या फोन देखते हैं तो भी आपको ये आर्टिफिशियल टियर्स आई ड्रॉप्स इस्तेमाल करनी चाहिए, ताकि आपको ड्राई आईज की परेशानी न हो क्योंकि ड्राई आईज में आंखों में खुजली होती है जो बाद में आंखों की अंदरूनी परतों को भी डैमेज कर सकती है.
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