Amla Seeds Benefits: आंवले का इस्तेमाल तो हम सभी करते हैं, लेकिन उसकी गुठली अक्सर बेकार समझकर फेंक दी जाती है. जबकि आयुर्वेद में आंवले की गुठली को भी औषधीय गुणों से भरपूर माना गया है. पुराने समय में वैद्य इसका उपयोग पाचन, बालों और त्वचा से जुड़ी समस्याओं में करते थे. सही तरीके और सीमित मात्रा में इस्तेमाल करने पर यह सेहत के लिए लाभकारी हो सकती है. इस खबर में जानिए कैसे आप इसका इस्तेमाल कर सकते हैं.
आंवला यानी आमलकी को आयुर्वेद में “रसायन” कहा गया है. आमतौर पर हम आंवले का फल खाकर उसकी गुठली को बेकार समझकर फेंक देते हैं. जबकि आयुर्वेदिक नजरिए से आंवले की गुठली भी औषधीय गुणों से भरपूर मानी जाती है. पुराने समय में वैद्य इसका इस्तेमाल कई घरेलू और आयुर्वेदिक नुस्खों में करते थे. देखने में भले ही यह गुठली सख्त लगे, लेकिन इसके अंदर मौजूद तत्व शरीर के लिए फायदेमंद माने जाते हैं.

आयुर्वेद में आंवला त्रिदोषनाशक माना गया है, खासतौर पर पित्त दोष को शांत करने वाला. चरक संहिता और सुश्रुत संहिता जैसे आयुर्वेदिक ग्रंथों में आंवले के फल, बीज और उसके अलग-अलग हिस्सों के गुण बताए गए हैं. आंवले की गुठली को बीज भाग माना गया है, जिसका स्वाद कसैला और हल्का कड़वा होता है. आयुर्वेद के अनुसार इसका स्वभाव शीतल होता है, जो शरीर में संतुलन बनाए रखने में मदद करता है. भले ही गुठली का उपयोग फल जितना आम नहीं है, फिर भी पारंपरिक ज्ञान में इसे कफ और पित्त से जुड़ी समस्याओं में उपयोगी माना गया है.

आंवले की गुठली में प्राकृतिक फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट तत्व और ऐसे पौध रसायन पाए जाते हैं, जो शरीर को अंदर से मजबूत बनाते हैं. आयुर्वेद के अनुसार इसके कसैले गुण शरीर में बढ़े हुए कफ को संतुलित करने में सहायक होते हैं. यही वजह है कि ग्रामीण इलाकों में इसे लंबे समय से पाचन से जुड़ी समस्याओं में इस्तेमाल किया जाता रहा है.
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आयुर्वेद मानता है कि आंवले की गुठली पाचन अग्नि को संतुलित करने में मदद करती है. कब्ज, गैस और अपच जैसी दिक्कतों में इसका पारंपरिक रूप से प्रयोग किया जाता रहा है. आंवले की तरह इसकी गुठली भी बालों के लिए फायदेमंद मानी जाती है. गुठली को सुखाकर उसका चूर्ण बनाकर तेल में पकाया जाए तो यह बालों को मजबूत करने में मदद करता है. इसके शीतल और कसैले गुण त्वचा को ठंडक देते हैं. कुछ पारंपरिक नुस्खों में इसे चूर्ण बनाकर लेप की तरह लगाया जाता है, जिससे मुंहासों और दाग-धब्बों में राहत मिल सकती है. आंवले की गुठली रक्त शर्करा को संतुलित रखने में भी सहायक मानी जाती है, हालांकि इसे मुख्य इलाज नहीं बल्कि सहायक उपाय माना जाता है.

आंवले की गुठली को पहले अच्छी तरह धोकर सुखाया जाता है. पूरी तरह सूखने के बाद इसे पीसकर चूर्ण बना लिया जाता है. आयुर्वेद में इस चूर्ण का उपयोग बहुत कम मात्रा में, शहद या गुनगुने पानी के साथ करने की सलाह दी जाती है. बाहरी इस्तेमाल के लिए इसे तेल या पानी में मिलाकर लगाया जाता है.

आयुर्वेद में यह भी साफ माना गया है कि किसी भी औषधि का ज्यादा सेवन नुकसान पहुंचा सकता है. आंवले की गुठली का सेवन हमेशा सीमित मात्रा में और वैद्य की सलाह से ही करना चाहिए. गर्भवती महिलाएं और गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को इसका इस्तेमाल करने से पहले विशेष रूप से विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए.
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