आधुनिक रसोई में मिक्सर-ग्राइंडर के बढ़ते इस्तेमाल से सिलबट्टा अब कम ही दिखाई देता है. बावजूद इसके, सिलबट्टे पर पिसे मसालों और चटनी का स्वाद आज भी लोगों को पसंद है. झारखंड के हजारीबाग जिले के बरकट्ठा प्रखंड स्थित सूर्यकुंड धाम के वार्षिक मेले में सिलबट्टे का खास बाजार लगता है. इस बार मेले में करीब आधा दर्जन व्यापारी सिलबट्टा बेचने पहुंचे हैं. व्यापारी राहुल केसरी ने बताया कि उनके परिवार में पिछले 80 वर्षों से सिलबट्टा बनाने का काम हो रहा है. इसे खास काले पत्थर से तैयार किया जाता है और मसाला पीसने में आसानी के लिए उस पर विशेष डिजाइन बनाई जाती है.
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