आधुनिक मिक्सर के दौर में भी हजारीबाग के सूर्यकुंड मेले में पारंपरिक सिलबट्टे की मांग बरकरार है. यहां ₹200 से ₹800 में काले पत्थर से निर्मित सिलबट्टे और ओखली बिक रहे हैं. 80 वर्षों से इस कला को सहेज रहे व्यापारी बताते हैं कि देशी स्वाद के शौकीन आज भी इसे प्राथमिकता दे रहे हैं.
शहरी इलाकों के बाजारों में जहां सिलबट्टा अब बहुत कम देखने को मिलता है. वहीं, झारखंड के हजारीबाग जिले के बरकट्ठा प्रखंड स्थित प्रसिद्ध सूर्यकुंड धाम में यह परंपरा आज भी जीवंत नजर आती है. सूर्यकुंड धाम में लगने वाला सालाना मेला न सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह पारंपरिक कारीगरी और ग्रामीण संस्कृति को भी संजोए हुए है. इस मेले में दूर-दराज के इलाकों से सिलबट्टा बेचने वाले व्यापारी खास तौर पर पहुंचते हैं.
इस वर्ष सूर्यकुंड धाम के वार्षिक मेले में करीब आधा दर्जन सिलबट्टा व्यापारी अपने पारंपरिक उत्पादों के साथ पहुंचे हैं. इनमें से एक व्यापारी राहुल केसरी ने बताया कि उनके परिवार में पिछले 80 वर्षों से सिलबट्टा बनाने और बेचने का काम किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि सिलबट्टा एक खास काले पत्थर से तैयार किया जाता है, जिसे पहले काटा जाता है और फिर उस पर विशेष डिजाइन बनाई जाती है. इन डिजाइनों का उद्देश्य यह होता है कि मसाले या चटनी पीसते समय फिसले नहीं और स्वाद पूरी तरह निखर कर आए.
कीमत 200 से 800 रुपये तक
राहुल केसरी ने बताया कि इस बार उनके पास 200 रुपये से लेकर 800 रुपये तक के सिलबट्टे उपलब्ध हैं. छोटे, मध्यम और बड़े आकार के सिलबट्टों के साथ-साथ ओखली और मूसल भी बिक्री के लिए लाए गए हैं. उन्होंने कहा कि वे साल भर अलग-अलग जगहों पर लगने वाले मेलों और बाजारों में जाकर अपने उत्पादों की बिक्री करते हैं.
हालांकि बदलते दौर का असर इस पारंपरिक व्यवसाय पर भी साफ दिखाई दे रहा है. इलेक्ट्रिक मिक्सर के बढ़ते चलन के कारण सिलबट्टे की मांग में काफी कमी आई है. इसके बावजूद आज भी कई लोग ऐसे हैं जो पारंपरिक तरीके से खाना बनाना पसंद करते हैं और हर घर में सिलबट्टा रखना जरूरी मानते हैं.
व्यापारियों का कहना है कि सिलबट्टे पर पीसी चटनी और मसालों का स्वाद बेहद लाजवाब होता है, जो मिक्सर में तैयार किए गए मसालों से बिल्कुल अलग होता है. यही वजह है कि स्वाद के शौकीन लोग आज भी सिलबट्टे को प्राथमिकता देते हैं. सूर्यकुंड धाम का यह मेला न केवल व्यापार का माध्यम है, बल्कि यह हमारी पुरानी परंपराओं और संस्कृति को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का भी काम कर रहा है.
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मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.
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