Hazaribagh Mayor Election: हजारीबाग नगर निगम चुनाव में इस बार बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला, जहां पत्रकार से जननेता बने अरविंद कुमार राणा ने मेयर पद पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की. सीमित संसाधनों और जनता के सहयोग से चुनाव लड़ने वाले राणा को 23,167 वोट मिले और उन्होंने मजबूत राजनीतिक समीकरणों को पीछे छोड़ दिया. उनकी जीत इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि यह क्षेत्र लंबे समय से बड़े दलों का गढ़ रहा है. लोगों से आर्थिक सहयोग लेकर चुनाव लड़ने वाले राणा की जीत को “जनता की जीत” बताया जा रहा है और शहर में जश्न का माहौल है.
पत्रकार से जननेता बने अरविंद कुमार राणा ने मेयर पद का चुनाव जीतकर बड़ा राजनीतिक उलटफेर कर दिया.
जनता के सहयोग से लड़ा चुनाव, मिली ऐतिहासिक जीत
नगर निगम चुनाव में अरविंद कुमार राणा को 23,167 वोट मिले, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी सरफराज अहमद दूसरे स्थान पर रहे. यह जीत इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि हजारीबाग लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है. इस बार भी पार्टी समर्थित उम्मीदवार सुदेश कुमार चंद्रवंशी मैदान में थे और चुनाव प्रचार में बड़े नेताओं से लेकर स्थानीय संगठन तक पूरी ताकत झोंक दी गई थी. इसके बावजूद मतदाताओं ने स्वतंत्र उम्मीदवार पर भरोसा जताते हुए अरविंद राणा को जीत दिलाई. चुनाव परिणाम आने के बाद शहर में जश्न का माहौल दिखा और समर्थकों ने विजय जुलूस निकालकर उनका स्वागत किया.
‘भिक्षाटन’ कर जुटाए चुनावी संसाधन
इस जीत की सबसे बड़ी खासियत रही चुनाव लड़ने का तरीका. अरविंद राणा ने लोगों से आर्थिक सहयोग लेकर चुनाव लड़ा. स्थानीय लोगों से मिले छोटे-छोटे योगदान से उन्होंने करीब 1 लाख 70 हजार रुपये जुटाए. यही वजह है कि उनकी जीत को “जनता की जीत” कहा जा रहा है. जीत के बाद उन्होंने कहा कि यह व्यक्तिगत नहीं बल्कि पूरे शहर के विश्वास की जीत है. उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि जनता ने उन्हें जो जिम्मेदारी दी है, उसे पूरी ईमानदारी से निभाना उनकी प्राथमिकता होगी.
सामाजिक कार्यों से भी बनाई पहचान
अरविंद राणा सिर्फ चुनावी राजनीति के कारण ही नहीं, बल्कि अपने सामाजिक कार्यों के कारण भी लंबे समय से चर्चा में रहे हैं. खासकर छठ महापर्व के दौरान फल की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए वे वर्षों से विशेष पहल करते रहे हैं. वे एक समिति बनाकर लोगों से सहयोग राशि जुटाते हैं और बड़ी मात्रा में फल मंगवाकर व्रतियों को लागत मूल्य पर उपलब्ध कराते हैं. सबसे खास बात यह है कि वितरण के बाद बची राशि लोगों को वापस कर दी जाती है, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है. उनके इस प्रयास को सामाजिक सेवा और जनभागीदारी का अनोखा उदाहरण माना जाता है.
राजनीतिक संदेश और जनता की उम्मीदें
इस चुनाव परिणाम ने यह संदेश भी दिया है कि स्थानीय स्तर पर जनसंपर्क और विश्वास बड़े राजनीतिक समीकरणों से ज्यादा प्रभावी हो सकते हैं. वहीं दूसरे स्थान पर रहे सरफराज अहमद, जो झारखंड मुक्ति मोर्चा से बागी होकर चुनाव मैदान में उतरे थे, उन्हें भी उल्लेखनीय मत मिले, लेकिन वे जीत हासिल नहीं कर सके. अब शहर की जनता को नए मेयर से विकास, पारदर्शिता और जनभागीदारी आधारित प्रशासन की उम्मीद है. हजारीबाग नगर निगम चुनाव का यह परिणाम सिर्फ एक जीत नहीं, बल्कि लोकतंत्र में जनता की ताकत और विश्वास की मिसाल के रूप में देखा जा रहा है.
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A Multimedia Journalist having experience of more than 14 years in mainstream media Industry. Currently Working with Network 18 Media & Investment Limited for News18 Hindi Website as a Chief Sub Editor. He …और पढ़ें
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