जानें खेती को लेकर किसान ने क्या बताया
किसान राम प्रसाद कुशवाहा ने लोकल 18 को बताया कि उन्होंने करीब 32 साल पहले खेती की शुरुआत की थी. उनके पिता सरकारी कर्मी थे, जिसकी वजह से लोगों ने मजाक में कहा था कि सरकारी नौकरी करने वाले के बच्चे खेती नहीं कर पाएंगे, लेकिन राम प्रसाद ने इसे चुनौती की तरह लिया और पारंपरिक खेती से हटकर नए-नए मॉडल पर प्रयोगात्मक खेती शुरू की.
उन्होंने बताया कि वह सामान्य फसलों के बजाय तरह-तरह की दुर्लभ, विदेशी और अनोखे फलों-सब्जियों की खेती करते हैं. इससे उन्हें न सिर्फ अच्छा मुनाफा मिलता है. बल्कि लोग दूर-दराज से उनके खेतों को देखने भी आते हैं. शुरुआती समय में वह देशभर के कृषि मेलों में घूमकर दुर्लभ बीज इकट्ठा करते थे, लेकिन इंटरनेट आने के बाद से उन्होंने ऑनलाइन भी बीज मंगवाना शुरू कर दिया.
इन अनोखी सब्जियों की कर चुके हैं खेती
किसान राम प्रसाद कुशवाहा बताते हैं कि उन्होंने अपनी जमीन पर अब तक लाल मूली, काली गाजर, बैंगनी फूलगोभी, पीली तरबूज, ड्रैगन फ्रूट, शुगर बेबी तरबूज, जापानी खीरा, काला टमाटर, रेनबो गाजर, गोल बैंगन, रेड लेडी पपीता, इटैलियन जुकीनी, थाई लंबी लौकी, सफेद बैंगन, ऑरेंज भिंडी, स्ट्रॉबेरी पालक, मशरूम लौकी, ब्लू कॉर्न, रेड मिर्च, थाई ग्रीन मिर्च, मक्के की काली किस्म, गेहूं की काली, ककड़ी की जापानी प्रजाति, लाल भुट्टा, लंबा करेला, ब्रोकली, चीनी पत्ता गोभी, रेड कैबेज, ग्रीन लेट्यूस, चेरी टमाटर, स्वीट पेपर, बेल पेपर की पांच रंगों वाली किस्में, मिनी कद्दू, थाई तरोई, पर्पल बीन्स, फ्रेंच बीन्स, काला तिल, सफेद मकई, जैपनीज टर्निप जैसी अनोखी वैरायटी सफलतापूर्वक उगाई है.
किसान ऐसे कर सकते हैं तगड़ी कमाई
उनके खेत में इतनी विविधता है कि इसे लोग उन्हें अनोखा किसान भी कहते हैं. उनकी पहचान अब पूरे राज्य में एक डेमो किसान के रूप में बन चुकी है. कई युवा किसान उनसे प्रेरणा लेकर नई तकनीकों और नई प्रजातियों की खेती शुरू कर रहे हैं. किसान राम प्रसाद कुशवाहा कहते हैं कि अगली पीढ़ी को खेती से जोड़ने के लिए नए-नए प्रयोग जरूरी है. जहां पारंपरिक खेती के माध्यम से अगली पीढ़ी को खेती में नहीं जोड़ा जा सकता, जिससे भोजन का संकट भविष्य में उत्पन्न होगा. साथ ही किसानों को नवाचार और जोखिम उठाने का साहस भी करना चाहिए. बदलते समय में नई विधि और नई किस्म के प्रयोग कर किसान अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं.
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