एक्सिडेंट मामले में सुनाया फैसला।
हरियाणा राज्य के यमुनानगर जिले के पंचमुखी हनुमान मंदिर जा रहे जोगिंदर की सड़क हादसे में हुई मौत के मामले में चंडीगढ़ मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (Motor Accident Claims Tribunal) कोर्ट ने फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि यह दुर्घटना ट्रैक्टर चालक र
दुर्घटना 5 दिसंबर 2021 की शाम चढ़ौली–बिलासपुर रोड पर आरा मशीन के पास हुई। जोगिंदर अपने गांव के सुरजीत के साथ मंदिर की तरफ पैदल जा रहे थे। जोगिंदर आगे चल रहे थे, तभी पीछे से तेज रफ्तार ट्रैक्टर हरियाणा नंबर ने उन्हें टक्कर मार दी। पत्नी सुखविंदर कौर ने कहा कि जोगिंदर डेयरी का काम और ठेकेदारी करते थे। परिवार की आय का एकमात्र स्रोत वही थे। अंतिम संस्कार पर लगभग 2 लाख रुपए खर्च हुए।
अस्पताल ले जाते समय मौत
सुरजीत ने कोर्ट को बताया कि ट्रैक्टर चालक ने टक्कर मारने के बाद थोड़ी देर गाड़ी रोकी, फिर मौके से भाग गया। वहीं मौजूद रजत (जोगिंदर का बेटा) और अन्य लोगों ने ट्रैक्टर का नंबर नोट किया।
गंभीर रूप से घायल जोगिंदर को पहले सिविल अस्पताल बिलासपुर और फिर जगाधरी अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने वहां उन्हें मृत घोषित कर दिया। जिसके बाद पुलिस ने अगली सुबह मामले में कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज कर ली। एफआईआर में ट्रैक्टर चालक राजीव का नाम था और उसमें हादसे और चालक की लापरवाही का पूरा ब्योरा था।
पुलिस ने 173 सीआरपीसी की रिपोर्ट के साथ चार्जशीट कोर्ट में जमा की, जिसमें स्पष्ट किया गया कि दुर्घटना तेज रफ्तार व लापरवाही से हुई थी और ट्रैक्टर उसी चालक का था। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में साफ लिखा है कि जोगिंदर की मौत सड़क हादसे में लगी गंभीर चोटों के कारण हुई।
जिला अदालत चंडीगढ़।
बीमा कंपनी की दलीलें क्यों नहीं टिकीं
बीमा कंपनी एचडीएफसी एग्रो ने अदालत में कई तर्क रखे, लेकिन सभी दलीलें साबित किए बिना ही कमजोर पड़ गईं। कंपनी का कहना था कि हादसा ट्रैक्टर से हुआ ही नहीं, इसलिए दावा बनता ही नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रैक्टर चालक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था और वह नशे में था, इसलिए बीमा कंपनी किसी भी तरह से जिम्मेदार नहीं ठहराई जा सकती। इसके अलावा, कंपनी ने यह दलील भी दी कि वाहन मालिक ने हादसे की जानकारी कंपनी को समय पर नहीं दी, जिससे पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन हुआ।
हालांकि अदालत ने पाया कि बीमा कंपनी अपनी किसी भी दलील को प्रमाणित नहीं कर पाई। न तो यह साबित हुआ कि ट्रैक्टर हादसे में शामिल नहीं था, न ही यह कि चालक बिना लाइसेंस या नशे में था। इसी तरह कंपनी यह भी सिद्ध नहीं कर पाई कि वाहन मालिक ने जानकारी देने में कोई देरी की थी। अदालत ने साफ कहा कि कंपनी ने जो भी आरोप लगाए, वो सिर्फ बोलने भर की बातें थीं। उनके समर्थन में कोई सबूत नहीं दिया गया। इसलिए अदालत ने इन दलीलों को मानने से इनकार कर दिया।
कोर्ट ने माना—दुर्घटना लापरवाही से हुई
MACT की जज ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि यह सड़क दुर्घटना पूरी तरह ट्रैक्टर चालक की लापरवाही का नतीजा थी। अदालत ने माना कि जोगिंदर को जो चोटें लगी थीं, वे सीधे इसी हादसे के कारण हुईं। FIR, गवाह के बयान, पुलिस की चार्जशीट और मेडिकल रिपोर्ट—ये सभी एक-दूसरे से पूरी तरह मेल खाते हैं और वही कहानी बताते हैं कि दुर्घटना ट्रैक्टर चालक की लापरवाही से ही हुई थी।
कठोर सबूत नहीं, परिवार को मिलेगा मुआवजा
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (Motor Accident Claims Tribunal) मामलों में बहुत कठोर या तकनीकी सबूतों की आवश्यकता नहीं होती। ऐसे मामलों में FIR, गवाहों के बयान और प्राथमिक मेडिकल दस्तावेज भी भरोसेमंद और पर्याप्त प्रमाण माने जाते हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस केस में उपलब्ध सभी दस्तावेज और बयान दुर्घटना और लापरवाही को साबित करने के लिए पर्याप्त हैं।
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