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हरियाणा में 2 सीटों के लिए होने वाले राज्यसभा चुनाव में अभी 10 दिन बचे हैं। भाजपा से संजय भाटिया, कांग्रेस से कर्मवीर बौद्ध और निर्दलीय सतीश नांदल मैदान में हैं। 3 निर्दलीय विधायकों और कुछ भाजपा विधायकों ने निर्दलीय उम्मीदवार नांदल को अपना समर्थन दे दिया है, जबकि इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) का अभी यह स्पष्ट नहीं है कि वे किस तरफ वोट करेंगे।
इनेलो के 2 विधायक हैं। अगर इतिहास देखें तो राज्यसभा चुनावों में इनेलो भाजपा के साथ ही गई है। हालांकि, इस बार जो निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल हैं, वे पहले इनेलो छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। ऐसे में यह भी चर्चा है कि इनेलो के विधायक नांदल को वोट न दें या फिर चुनाव से दूरी बना लें।
हालांकि, इससे ज्यादा फर्क पड़ता नहीं दिख रहा है क्योंकि संख्याबल के हिसाब से कांग्रेस और भाजपा दोनों ही मजबूत स्थिति में हैं। मामला सिर्फ क्रॉस वोटिंग को लेकर ही बिगड़ सकता है।
इनेलो प्रदेश अध्यक्ष रामपाल माजरा ने दैनिक भास्कर एप की टीम से बातचीत में कहा कि उनके लिए यह बहुत ही महत्वपूर्ण विषय है। इस पर पॉलिटिकल अफेयर्स की मीटिंग में ही फैसला लिया जाएगा। यह मीटिंग कब होगी, इस पर अभी कोई फैसला नहीं हो पाया है। हां, यह जरूर है कि इस मामले में पार्टी कोई जल्दबाजी में फैसला नहीं लेगी।

यहां पढ़िए INLD क्यों कर रही है फैसले में देरी…
राजनीतिक मोलभाव की गुंजाइश बनाए रखना
इनेलो के पास भले ही सिर्फ 2 विधायक हों, लेकिन राज्यसभा चुनाव में हर वोट की अहमियत होती है। ऐसे में पार्टी तुरंत अपना रुख स्पष्ट करने के बजाय इंतजार कर रही है ताकि अंतिम समय तक राजनीतिक मोलभाव की स्थिति बनी रहे। इससे पार्टी को भविष्य की राजनीति या किसी मुद्दे पर लाभ लेने की संभावना बनी रहती है।
गैर-कांग्रेस राजनीति की परंपरा
इनेलो की राजनीतिक पृष्ठभूमि देखें तो देवीलाल और ओमप्रकाश चौटाला के दौर से पार्टी की पहचान गैर-कांग्रेस राजनीति की रही है। हरियाणा में जब-जब गैर-कांग्रेस सरकार बनी, उसमें लोकदल ने सबसे बड़ा विपक्षी दल रहा है। ऐसे में पार्टी जल्दबाजी में कांग्रेस के पक्ष में जाने का संकेत देने से बच रही है।

INLD अगर बहिष्कार करती है तो ये होगी स्थिति
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट और राजनीतिक मामलों के जानकार हेमंत कुमार ने कहा कि हरियाणा विधानसभा में कुल 90 विधायक हैं। राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए सामान्य फार्मूला ये होता है जीत का आंकड़ा = (कुल विधायक ÷ सीटें + 1) + 1 इस बार 2 सीटों के लिए चुनाव होना है, इसलिए सामान्य स्थिति में जीत का आंकड़ा लगभग 31 वोट बनता है।
अगर INLD के 2 विधायक बहिष्कार कर देते हैं तो सदन की प्रभावी संख्या 90 से घटकर 88 रह जाएगी। ऐसे में नया गणित इस तरह बन सकता है। 88 विधायकों के हिसाब से जीत का आंकड़ा करीब 30 वोट के आसपास आ सकता है। यानी उम्मीदवार को जीत के लिए एक वोट कम भी पड़ सकता है। निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल अगर विपक्षी या क्रॉस वोटिंग के सहारे चुनाव लड़ रहे हैं तो INLD के दो वोट न पड़ने से उनका गणित कमजोर पड़ सकता है। हरियाणा में सरकार बीजेपी की है और उसके साथ निर्दलीय विधायक भी हैं। ऐसे में कुल वोट कम होने से सत्तापक्ष के लिए अपने उम्मीदवार को जिताना थोड़ा आसान हो सकता है।

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