हरियाणा राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस भले ही एकजुटता का दावा कर रही हो लेकिन पार्टी के भीतर क्रॉस वोटिंग की आशंका को लेकर बेचैनी बढ़ गई है। ऐसे हालात में कांग्रेस अपने विधायकों को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें दूसरे प्रदेश में शिफ्ट करने की तैयारी कर रही है।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार राज्यसभा चुनाव कई बार ऐसे मोड़ ले लेते हैं जहां संख्या का गणित अचानक राजनीतिक मनोविज्ञान में बदल जाता है। इसी कारण कांग्रेस नेतृत्व को अपने विधायकों की निष्ठा को लेकर चिंता सता रही है। कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती सत्ता और विपक्ष के बीच का व्यावहारिक समीकरण भी है।
प्रदेश में कांग्रेस विधायक विपक्ष में रहते हुए अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं को हल कराने के लिए प्रशासन और सरकार के साथ तालमेल बनाए रखते हैं। ऐसे में पार्टी को आशंका है कि कहीं भाजपा इस स्थिति का राजनीतिक लाभ न उठा ले। इसके अलावा वर्ष 2029 से पहले प्रस्तावित परिसीमन भी विधायकों की राजनीतिक रणनीति को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में हर विधायक अपने भविष्य को ध्यान में रखकर निर्णय लेने की स्थिति में रहता है।
कांग्रेस की चिंता का एक कारण राज्यसभा उम्मीदवार कर्मवीर सिंह बौद्ध को लेकर पार्टी के भीतर बनी असहजता भी है। कई विधायकों के लिए यह नाम नया बताया जा रहा है। पार्टी के भीतर यह सवाल भी उठ रहा है कि जिस व्यक्ति को अधिकतर नेता ठीक से नहीं जानते, उसे अचानक राज्यसभा उम्मीदवार क्यों बनाया गया। हालांकि पार्टी नेतृत्व का कहना है कि सभी विधायक कर्मवीर सिंह बौद्ध को जिताने के लिए एकजुट हैं लेकिन कांग्रेस को 2016 और 2022 के राज्यसभा चुनावों का अनुभव भी याद है। उन दोनों चुनावों में पर्याप्त संख्या होने के बावजूद कांग्रेस के समीकरण बिगड़ गए थे और भाजपा ने हारी हुई बाजी अपने पक्ष में कर ली थी।
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