करनाल में घरौंडा के सरकारी अस्पताल में डॉक्टर के साथ हुई कथित मारपीट के मामले को लेकर मेडिकल एसोसिएशन हरियाणा और पुलिस प्रशासन के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है। डॉक्टरों का प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार शाम को एडीजीपी करनाल रेंज से मिला और एसएचओ व अन्य चार पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी की मांग रखी। हालांकि एडीजीपी की ओर से विभागीय जांच की बात कही गई, जिससे डॉक्टर संतुष्ट नहीं हुए और आज यानी शनिवार सुबह 9 बजे तक कार्रवाई नहीं होने पर पूरे हरियाणा में ओपीडी सेवाएं बंद करने की चेतावनी दे दी। एडीजीपी से मिले डॉक्टरों के प्रतिनिधि
मेडिकल एसोसिएशन हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अनिल यादव के नेतृत्व में चार-पांच डॉक्टरों का प्रतिनिधिमंडल एडीजीपी करनाल रेंज रवि किरण (आईपीएस) के कार्यालय में पहुंचा। यहां डॉक्टरों ने घरौंडा के सरकारी अस्पताल में हुई घटना के बारे में विस्तार से चर्चा की और कहा कि एसएचओ व अन्य पुलिस कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया जाना चाहिए। इस पर एडीजीपी रवि किरण ने डॉक्टरों को बताया कि एसएचओ को पहले ही सस्पेंड कर लाइन हाजिर कर दिया गया है और उसके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जा सकती है। अगर डॉक्टर करनाल पुलिस से जांच नहीं करवाना चाहते तो किसी अन्य पुलिस अधिकारी या सिविल अधिकारी से भी जांच कराई जा सकती है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी। एडीजीपी ने डॉक्टरों से कहा कि वे अपनी मांगों को लेकर एक आवेदन दे दें। डॉक्टरों ने इस पर कहा कि वे बाद में आवेदन दे देंगे। मीडिया से बोले प्रदेश अध्यक्ष, जवाब से नहीं मिले संतुष्ट
एडीजीपी से मुलाकात के बाद मेडिकल एसोसिएशन हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अनिल यादव ने मीडिया से बातचीत की। उन्होंने कहा कि वे आईजी साहब से मिले, लेकिन उनकी बातों से उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। उन्होंने स्पष्ट कहा कि एसोसिएशन ने फैसला लिया है कि शनिवार सुबह 9 बजे तक का इंतजार किया जाएगा। अगर तब तक एसएचओ के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं होती और उसे व अन्य पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार नहीं किया जाता तो पूरे हरियाणा में ओपीडी सेवाएं बंद कर दी जाएंगी। उन्होंने कहा कि हालांकि इमरजेंसी सेवाएं जैसे पोस्टमार्टम, इमरजेंसी और लेबर रूम की सेवाएं जारी रहेंगी। पुलिस को संदेश देने के लिए ओपीडी बंद करने की चेतावनी
डॉ. अनिल यादव ने कहा कि ओपीडी बंद करने का फैसला पुलिस को संदेश देने के लिए है। उन्होंने कहा कि पुलिस में इंसानियत कितनी बची है यह पता नहीं, लेकिन डॉक्टरों में इंसानियत अभी भी बची हुई है। इसलिए जरूरी सेवाओं को बंद नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि एसोसिएशन केवल एफआईआर दर्ज करने की मांग कर रही है। अगर एफआईआर दर्ज कर दी जाए तो मामला काफी हद तक सुलझ सकता है, लेकिन अभी तक एफआईआर तक दर्ज नहीं की जा रही है। जब तक एफआईआर दर्ज नहीं होगी, तब तक ओपीडी बंद रहेगी। कानून सबके लिए समान होना चाहिए
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि अगर एसएचओ ने कानून तोड़ा है तो कानून को अपना काम करना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर किसी डॉक्टर या अस्पताल कर्मचारी ने एसएचओ को थप्पड़ मार दिया होता तो क्या कानून इसी तरह चुप रहता। उन्होंने कहा कि अक्सर कहा जाता है कि कानून सबके लिए समान है, लेकिन इस मामले में वह समानता नजर नहीं आ रही। डॉ. अनिल यादव ने यह भी कहा कि अब एसएचओ यह कह रहा है कि डॉक्टर ने उसे गाली दी थी। अगर ऐसा है तो उसका कोई सबूत पेश किया जाए। यदि कोई सबूत नहीं है तो इसका मतलब है कि एसएचओ मनगढ़ंत बात कर रहा है। 4 मार्च को हुई थी पूरी घटना
जानकारी के अनुसार 4 मार्च को घरौंडा के सरकारी अस्पताल में कुछ मरीज मेडिकल कानूनी जांच के लिए आए थे। आरोप है कि उन मरीजों ने ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर प्रशांत के साथ गलत व्यवहार किया। स्थिति बिगड़ने पर डॉक्टर ने पुलिस को फोन कर मदद मांगी। अस्पताल स्टाफ के अनुसार फोन पर डॉक्टर और पुलिस के बीच बातचीत हुई। इसी दौरान कथित तौर पर डॉक्टर द्वारा एसएचओ को गाली देने की बात सामने आई। इसके बाद एसएचओ मौके पर अस्पताल पहुंचा और डॉक्टर को थप्पड़ मार दिए। इस घटना का सीसीटीवी वीडियो भी सामने आया था। 5 मार्च को एसएचओ हुआ सस्पेंड, 6 मार्च को भी जारी रही हड़ताल
घटना के बाद मेडिकल एसोसिएशन ने एसएचओ के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी। हालांकि विभाग ने 5 मार्च को एसएचओ को सस्पेंड कर दिया, लेकिन एसोसिएशन एफआईआर दर्ज कराने की मांग पर अड़ी हुई है। 6 मार्च को भी डॉक्टरों की हड़ताल जारी रही। वहीं दूसरी ओर घरौंडा की कई सामाजिक संस्थाएं एसएचओ के समर्थन में सामने आईं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई।*
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