एसीबी के सवाल और रिभव के जवाब
सवाल : भुगतान के आदेश किसने अधिकृत किए?
रिभव : सभी भुगतान प्रक्रिया के तहत किए गए हैं। इसमें बैंक के स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) का पालना किया गया है। बाकायदा वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) सत्यापन के बाद ट्रांसफर प्रक्रिया हुई है।
सवाल : फर्जी हस्ताक्षर या दस्तावेज़ की जानकारी?
रिभव : दस्तावेज असली लगे इसलिए हमें संदेह नहीं हुआ। हैंडराइटिंग एक्सपर्ट व फॉरेंसिक रिपोर्ट यह साबित करे कि हस्ताक्षर स्कैन, कॉपी या एडिटेड थे या पहले भी समान पैटर्न इस्तेमाल हुआ है।
सवाल : रकम आगे कहां ट्रांसफर हुई?
रिभव : राशि नियमानुसार लाभार्थी खातों में गई। मनी ट्रेल में शेल कंपनियों या संबंधित व्यक्तियों के खातों से लिंक नहीं मिलने पर बयान के सत्यापन की प्रक्रिया जारी है।
सवाल : कितना फायदा उठाया?
रिभव : हमें कोई आर्थिक फायदा नहीं हुआ है। जांच में संपत्ति खरीद, निवेश या रिश्तेदारों के खातों में असामान्य लेन-देन का रिकॉर्ड खंगालने पर यह मिसमैच हो सकता है।
सवाल : यह व्यक्तिगत साजिश थी या संगठित?
रिभव : यह सिस्टम की गलती थी कोई साजिश नहीं है।
ज्वेलर्स, प्रॉपर्टी डीलर व बिल्डर्स से जुड़े तार
धोखाधड़ी के तार बिल्डर, ज्वेलर्स, प्रॉपर्टी डीलर सहित अन्य कारोबारियों से जुड़े हैं। इनके खातों का इस्तेमाल सरकारी राशि की हेराफेरी के लिए किया गया है। इन आरोपियों की चेन पंचकूला, चंडीगढ़, मोहाली से लेकर गुरुग्राम, दिल्ली तक है। व्यापक स्तर पर छापेमारी व सबूत जमा करने के लिए एसीबी मुख्यालय ने गुरुग्राम, हिसार, करनाल, रोहतक की टीमों को लगाया गया है।
विभागीय कर्मचारियों को नोटिस, गुप्त तरीके से की जा रही पूछताछ
एसीबी ने इंस्पेक्टर अमित कुमार की शिकायत पर 23 फरवरी को पंचकूला में भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 316(5), 318(4), 336(3), 338, 340(2), 61(2) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1) व 13(2) के तहत केस दर्ज किया है। इसमें आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के अज्ञात अधिकारियों सहित कई सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार की गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।
सूत्रों के अनुसार एसीबी ने आईडीएफसी बैंक में खाताधारक विभागों में वित्तीय लेनदेन देखने वाले कर्मचारियों को नोटिस जारी किया है। जो कर्मचारी जिस जिले में है उससे एसीबी की टीमें वहीं गुप्त तरीके से पूछताछ कर रही हैं। एसीबी विभागीय लेनदेन व मनीट्रेल को समझने के लिए अपने वित्त विभाग के दो अधिकारियों का सहयोग भी ले रही है।
बिना अनुमति के खुले खाते
एसीबी की प्रारंभिक जांच में सामने आया कि मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना-2.0 के तहत मिलने वाली 50 करोड़ रुपये और 25 करोड़ रुपये की राशि को सक्षम अधिकारियों की अनुमति के बिना ही निजी बैंकों में जमा किया गया था। जब विभाग ने इन खातों को बंद कर एक्सिस बैंक में पैसा ट्रांसफर करने का निर्देश दिया तो बैंकों ने इसमें टालमटोल की। इसके बाद आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने 50 करोड़ रुपये की जगह केवल 1.27 करोड़ रुपये लौटाए।
जांच में यह भी सामने आया कि बैंक अधिकारियों और सरकारी कर्मचारियों ने आपसी मिलीभगत से सरकारी धन का गबन करने के लिए रिकॉर्ड में छेड़छाड़ की। मामले की जांच के लिए डीएसपी शुकपाल सिंह को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है।
#000011 और कई चेक व डेबिट नोट का प्रयोग…
खाते में लिंक मोबाइल नंबर विभाग के अधीक्षक प्रिंस का है। एसीबी जांच में सामने आया है कि धोखाधड़ी के लिए #000011 संख्या के चेक सहित कई चेक और डेबिट नोट का प्रयोग किया गया।
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