कभी CCTV कैमरे में कैद होती तस्वीर, तो कभी ग्रामीणों के फोन में फोटो इसके सबूत हैं. इस स्थिति ने वन विभाग की योजनाओं और दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि जंगली जानवरों को रिहायशी क्षेत्रों में आने से कैसे रोका जाए और इसके लिए वन विभाग क्या कदम उठा रहा है.
जंगली हाथियों और अन्य जानवरों के रिहायशी क्षेत्र में दस्तक के सवाल का जवाब देते हुए हरिद्वार डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध ने बताया कि हाथियों या अन्य जंगली जानवरों को रिहायशी क्षेत्र में आने से रोकने के लिए कई योजनाएं बनाई गई हैं.
उनके अनुसार, हरिद्वार में मेलों और धार्मिक आयोजनों के चलते यह समस्या और बढ़ जाती है. इसको ध्यान में रखते हुए हाथी खाई बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है. बैरागी कैंप से लेकर अजीतपुर और आसपास के क्षेत्रों में करीब 7 किलोमीटर लंबी सोलर फेंसिंग और दीवार बनाने का प्रस्ताव उच्च स्तर को भेजा गया है. इसके बनने के बाद जंगली जानवरों की रिहायशी क्षेत्रों में प्रवेश पर रोक लगाई जा सकेगी.
डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध ने बताया कि हाथियों का रिहायशी क्षेत्र में आना पहले से ही जारी है. वन प्रभाग का प्रयास है कि हाथी और अन्य जंगली जानवरों का आवागमन रिहायशी क्षेत्रों में न हो और गांव व शहर सुरक्षित रहें.
हाथी मित्र योजना, जमीनी स्तर पर निगरानी
वन विभाग ने जमीनी स्तर पर निगरानी बढ़ाने के लिए हाथी मित्र योजना शुरू की है. इस योजना में 60 हाथी मित्रों को काम पर रखा गया है, जो हाथियों की आवाजाही पर नजर रखेंगे. यदि हाथी रिहायशी क्षेत्रों के पास पहुंचें तो हाथी मित्र समय रहते ग्रामवासियों को सूचित करेंगे और विभाग को जानकारी देंगे.
डीएफओ के अनुसार, यह पहल मानव और हाथियों के बीच संघर्ष को कम करने के उद्देश्य से शुरू की गई है. हाथी मित्रों की निगरानी से न केवल हाथियों के आने-जाने पर नियंत्रण रहेगा बल्कि ग्रामीणों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी.
हाथियों की आवाजाही पर रहेगी पैनी नजर
गौरतलब है कि पहले भी जंगली हाथियों और अन्य जानवरों के रिहायशी क्षेत्रों में आने की घटनाएं लगातार होती रही हैं. विभाग ने समय-समय पर कई योजनाएं बनाई हैं, लेकिन किसानों की फसल को नुकसान पहुंचना अभी भी जारी है.
हरिद्वार में वन विभाग की यह पहल मानव और जंगली जानवरों के बीच संतुलन बनाए रखने में मददगार साबित होगी. हाथी खाई और हाथी मित्रों की निगरानी से न केवल फसल को नुकसान से बचाया जा सकेगा बल्कि ग्रामीणों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी. ऐसे में वन विभाग की यह योजना स्थानीय समुदाय और जंगली जानवरों दोनों के हित में है.
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