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पश्चिम चंपारण के हरेंद्र भारती ने अपने बगीचे को दुनिया के सबसे मीठे और महंगे आमों का ठिकाना बना दिया है. इनके पास मियाज़ाकी, हुस्नआरा और नूरजहां जैसी 144 दुर्लभ किस्में मौजूद हैं. एक दशक की मेहनत से तैयार यह रिसॉर्ट अब विदेशी और भारतीय नस्लों के अनूठे संगम के लिए पूरे बिहार में मशहूर हो चुका है.
पश्चिम चंपारणः क्या आपने कभी आम के किसी ऐसे शौकीन को देखा है, जिसे अपने बागीचे में दुनियाभर में पाई जाने वाली आम की सभी किस्मों को समेट लेने का शौक हो ? यदि नहीं, तो इस लेख में हम आपको एक ऐसे ही व्यक्ति के बारे में बता रहे हैं, जो दशकों से आम की विभिन्न किस्मों के कलेक्शन में लगे हैं और अबतक 140 से अधिक किस्मों की बागवानी कर उसका स्वाद भी ले चुके हैं. बताते चलें कि अपने इस शौक के लिए चम्पारण भर में प्रसिद्ध यह शख्स कोई और नहीं, बल्कि पश्चिम चम्पारण के बगहा 02 प्रखंड स्थित मलकौली निवासी हरेंद्र भारती हैं.
140 से अधिक किस्में
हरेंद्र ने अपने बागीचे में दुनिया के सबसे महंगे आम से लेकर दुनिया के सबसे मीठे और सबसे खूबसूरत आम तक की बागवानी की है.मजे की बात यह है कि महेंद्र ने इन सभी पौधों को क़रीब एक दशक पहले लगाए था, जो वर्तमान में फ्रूटिंग स्टेज में हैं.ऐसे में 140 से अधिक किस्म के आम और उनके अनोखे पेड़ को देखने के लिए हर साल ज़िले के कोने कोने से लोग मलकौली स्थित महेंद्र के घर का रुख करते हैं.
दर्जनों दुर्लभ आम के किस्म
हरेंद्र ने क़रीब 22 एकड़ के क्षेत्र में आम की 144 प्रजातियों की बागवानी की है.इनमें ज्यादातर प्रजातियां ऐसी हैं जिनके बारे में गिने चुने लोग ही जानते हैं. जर्दा, सब्ज़ा, मालदा, बीजू, दशहरी, केसर इत्यादि किस्मों को तो सब जानते हैं, लेकिन दुनिया के सबसे मीठे आम भारत दर्शन, सबसे महंगे आम मियाज़ाकि, सबसे खूबसूरत आम हुस्नआरा और आकार में सबसे बड़े आम नूरजहां के बारे में गिने चुने लोगों को ही जानकारी होती है.महेंद्र ने अपने रिसॉर्ट में इन सभी बेशकीमती आमों की बागवानी की है.
दशकों से कर रहे हैं आम का कलेक्शन
लोकल 18 से बात करते हुए महेंद्र बताते हैं कि बचपन से ही उन्हें आम खाने का जबरदस्त शौक रहा है.अपने इसी शौक को पूरा करने के लिए उन्होंने देश के कोने कोने से आम की उन सभी प्रजातियों के पौधों की खरीदारी की है, जिसकी जानकारी उन्हें किसी न किसी के माध्यम से मिलती थी.देखते ही देखते उनका रिसॉर्ट क़रीब 144 प्रजातियों के आम के पौधों से भर गया.अब बारी थी पौधों के विकास की.महेंद्र ने दिन रात पौधों की देख भाल की और उन्हें फ्रूटिंग की अवस्था तक लाकर छोड़ा.वर्तमान में रिसॉर्ट में मौजूद हर एक पेड़ से आम का फलन होता है, जिसका स्वाद महेश और उनका परिवार लेता है.
विदेशी किस्मों के आम की भी भरमार
बता दें कि महेंद्र ने शरीफे की तरह दिखने वाले आम ‘चेरिमोया’, सेब की तरह दिखने वाले आम ‘रोमानिया’, अमेरिकन नस्ल की आम ‘टॉमी एटकिंस’, साउथ अफ्रीका की सेंसेशन, भारतीय नस्ल की आम मल्लिका, अर्जुन, केसर और मालदा की सात प्रजातियों सहित अन्य दर्जनों प्रकार के आम की बागवानी की है.
About the Author
मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.
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