आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार और जिला प्रशासन द्वारा कई महत्वपूर्ण पहल किए जा रहे हैं. इसी कड़ी में गुमला जिला के लोगों को स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से व आत्मनिर्भर बनाने के लिए पांच दिनों का मोती पालन का निशुल्क प्रशिक्षण दिया जाएगा. ट्रेनिंग मत्स्य किसान प्रशिक्षण केंद्र शालीमार धुर्वा सेक्टर 2 रांची में होगी.
यह प्रशिक्षण कल से यानी कि 9 फरवरी से शुरू होगा, जो 13 फरवरी तक चलेगा. इसलिए जो रोजगार के इच्छुक हैं युवक युवतियां हैं, और खुद का स्वरोजगार करना चाहते हैं तो जल्द से जल्द मत्स्य विभाग कार्यालय, गुमला में संपर्क कर ट्रेनिंग में भाग ले सकते हैं. यह कार्यालय करमटोली रोड वन तालाब के समीप स्थित है. या फिर आप मत्स्य किसान प्रशिक्षण केंद्र शालीमार धुर्वा रांची में जाकर संपर्क कर रहे है. प्रशिक्षण शालीमार धुर्वा रांची में ही आयोजित होगी.
इन कागजात की होगी जरूरत
गुमला की मत्स्य पदाधिकारी कुसुम लता ने लोकल 18 को बताया कि जिले के लोगों को स्वरोजगार से जोड़ने व आत्मनिर्भर बनाने के लिए पांच दिवसीय निशुल्क मोती पालन और उद्यमिता विकास की ट्रेनिंग दी जाएगी. यह प्रशिक्षण 9 फरवरी से 13 फरवरी 2026 तक चलेगा. जो किसान बंधु या स्वरोजगार के इच्छुक व्यक्ति इस पांच दिवसीय मोती पालन ट्रेनिंग में भाग लेना चाहते हैं. वे हमारे जिला मत्स्य कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं. हमारा कार्यालय करमटोली रोड से सटे वन तालाब के रास्ते में स्थित है. ट्रेनिंग में प्रशिक्षण लेने के लिए सर्वप्रथम आपको कार्यालय में अपना नाम दर्ज करना होगा. वहीं ट्रेनिंग के लिए इच्छुक मोती पालक किसान के पास आधार कार्ड, बैंक पासबुक और मोबाइल नंबर होना आवश्यक है. जिसमें वे ट्रेनिंग के पश्चात मोती पालन का कार्य कर सकते हैं.
मुफ्त भोजन और रहने की सुविधा
ट्रेनिंग मत्स्य किसान प्रशिक्षण केंद्र शालीमार धुर्वा सेक्टर 2 रांची में होगी. वहीं ट्रेनिंग के लिए इच्छुक मोती पालकों को अपने खर्चे पर आना जाना होगा. उसके लिए यात्रा भत्ता या कोई अन्य भत्ता देय नहीं होगा. वहीं प्रशिक्षण में भाग लेने के लिए ट्रेनिंग के शुरू होने से पूर्व शालीमार प्रशिक्षण केंद्र रांची में रजिस्ट्रेशन करना होगा. जिसके लिए भोजन पर व्यय हेतु रजिस्ट्रेशन शुल्क मात्र ₹200 जमा करना होगा. ट्रेनिंग के दौरान मुफ्त भोजन और आवास की सुविधा मिलेगी.
हमारे देश व जिले में मोती पालन की प्रचुर संभावनाएं हैं. मोती पालन एक ऐसा व्यवसाय है जिसकी शुरुआत के लिए किसी विशेष तकनीक की आवश्यकता नहीं होती है. मीठे जल में मोती पालन के लिए उपयुक्त प्रजातियों में लैमेलिडेन्स, मार्जिनालिस, लैमेलिडेन्स कोरिआनस और पेरेशिया कोरुगाटा है. एक मोती को तैयार होने में 18 से 24 माह लगता है और इसकी कीमत गुणवत्ता के आधार पर 300 से 15 हजार रुपए तक होती है.
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