Gumla Drinking Water Crisis: गुमला के वार्ड नंबर 9, अहमद लेन में 15 दिनों से जलापूर्ति ठप है. पाइपलाइन आधी-अधूरी है, लेकिन नगर परिषद मीटर लगाकर टैक्स वसूलने की तैयारी में है. देखिए 300 परिवारों की प्यास और प्रशासन की बेरुखी पर हमारी विशेष ग्राउंड रिपोर्ट.
सूखे पड़े नल और 13 दिनों का लंबा सन्नाटा
अहमद लेन की तंग गलियों में प्रवेश करते ही बाल्टियों और बर्तनों की कतारें नजर आने लगती हैं. यहां के निवासियों की दिनचर्या सुबह की चाय से नहीं, बल्कि पानी की तलाश से शुरू होती है. स्थानीय समाजसेवी मोहम्मद सुहेल बताते हैं कि पिछले 13 दिनों से इलाके में सप्लाई का पानी नहीं आया है. गुमला एक पहाड़ी इलाका है. जहां भू-गर्भ जल स्तर (Water Level) काफी नीचे है. ऐसे में यहां के लोग पूरी तरह से नगर परिषद की पाइपलाइन पर निर्भर हैं. सुहेल कहते हैं कि हमारे पीछे खड़ी माताएं-बहनें पड़ोस के किसी निजी बोरिंग या दूर-दराज के चापानल से पानी ढोकर ला रही हैं. जब कड़ाके की ठंड में यह हाल है, तो आने वाली गर्मियों की कल्पना मात्र से रूह कांप जाती है.
आधी-अधूरी पाइपलाइन, विकास का अधूरा सच
ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान एक और कड़वा सच सामने आया. पूरे वार्ड में सप्लाई लाइन का जाल तक नहीं बिछा है. वार्ड नंबर 9 के लगभग आधे हिस्से में पाइपलाइन ही नहीं पहुंची है. जहां पाइपलाइन है भी, वहां तकनीकी खामियों या अनियमितता के कारण 7 से 15 दिनों के अंतराल पर पानी दिया जाता है. स्थानीय महिला सय्यदा खातून बताती हैं कि यह गुमला की सबसे घनी आबादी वाला इलाका है. जहां अल्पसंख्यक और गरीब तबके के लोग रहते हैं. क्या हमारी गरीबी ही हमारी सबसे बड़ी समस्या है कि प्रशासन को हमारी प्यास नहीं दिखती? सय्यदा के अनुसार, महिलाओं को घर के कामकाज छोड़कर घंटों पानी के लिए भटकना पड़ता है.
नगर परिषद का ‘अजीब’ फरमान, पानी गायब, मीटर तैयार
इलाके के लोगों में पानी की कमी से ज्यादा गुस्सा नगर परिषद के एक ताजा निर्देश को लेकर है. एक तरफ जहां प्रशासन नियमित पानी देने में विफल रहा है. वहीं दूसरी ओर हर घर में वाटर मीटर (Water Meter) लगाने का फरमान जारी कर दिया गया है. लोगों का तर्क सीधा और स्पष्ट है जब नलों में पानी ही नहीं आ रहा, तो आप मीटर किसलिए लगा रहे हैं? क्या हवा नापने के लिए टैक्स लेंगे? निवासियों का आरोप है कि बुनियादी ढांचा दुरुस्त करने के बजाय प्रशासन राजस्व वसूली (Tax Collection) पर ज्यादा ध्यान दे रहा है.
भीषण गर्मी की दस्तक और प्रशासन को चेतावनी
अभी जनवरी का महीना है और ठंड अपने चरम पर है, लेकिन अहमद लेन के लोगों के माथे पर पसीना आने वाली गर्मी की चिंता साफ दिख रही है. पहाड़ी ढलानों पर बसे इस शहर में गर्मियों में टैंकर भी नहीं पहुंच पाते. स्थानीय लोगों की प्रशासन से मांगें बिल्कुल स्पष्ट हैं. अहमद लेन की आधी-अधूरी पाइपलाइन को तत्काल पूरा किया जाए. जलापूर्ति का एक निश्चित शेड्यूल तय हो और हर हाल में नियमित पानी दिया जाए. घनी आबादी को देखते हुए मोहल्ले में अतिरिक्त सार्वजनिक स्टैंड पोस्ट (सरकारी नल) लगाए जाएं.
About the Author
मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.