मेहसाणा जिले में लिव-इन में रह रहे 22 वर्षीय मुस्लिम युवक और 21 वर्षीय हिंदू युवती को परिवार ने अलग कर दिया तो युवक ने हाईकोर्ट में हैबियस कॉर्पस याचिका दायर की। इस मामले में हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। महिला संरक्षण गृह में रह रही युवती को कोर्ट में बुलाकर उसकी इच्छा पूछी गई। कोर्ट ने अलग-अलग धर्म के युवक-युवती को स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत शादी करने का आदेश दिया है। साथ ही भविष्य में अगर दोनों अलग हो जाते हैं तो युवती की आर्थिक सुरक्षा के लिए युवक को 3 लाख रुपए जमा कराने का निर्देश भी दिया गया है। युवक ने कोर्ट को बताया कि वह स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत शादी करने और सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करने के लिए तैयार है। उसने यह भी भरोसा दिलाया कि वह अपनी क्षमता के अनुसार युवती के भरण-पोषण, रहने की व्यवस्था और अन्य सभी जरूरतों का ध्यान रखेगा तथा उसके साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार करेगा। यह है मामला
मेहसाणा जिले में अलग-अलग धर्म के युवक-युवती लिव इन रिलेशनशिप में साथ रह रहे थे। परिवार ने दोनों को अलग किया तो युवती को पालनपुर के महिला संरक्षण गृह में रखा गया। इसके बाद युवक ने कोर्ट में हैबियस कॉर्पस याचिका दाखिल कर अपनी पार्टनर की कस्टडी मांगी और कहा कि वे दोनों शादी करना चाहते हैं।
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