गजरात में राजकोट जिले के आटकोट में 7 वर्षीय मासूम से निर्भया जैसी क्रूर वारदात के मामले में स्पेशल कोर्ट ने आरोपी को मौत की सजा सुनाई है। पुलिस ने 11 दिन के अंदर 8 दिसंबर को आरोपी के खिलाफ चार्जशीट फाइल की। 12 जनवरी को यानी 35 दिन में कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया और आरोपी को दोषी पाया। शनिवार को 43वें दिन आरोपी रेमसिंह तेरसिंह डुडवा के खिलाफ स्पेशल कोर्ट के जज वीए राणा ने आखिरी फैसला सुनाया। राजकोट जिले के आटकोट के पास कानपर गांव के बाहरी इलाके में 4 दिसंबर, 2025 को दिल्ली में हुए निर्भया कांड जैसी वारदात हुई थी। खेत मजदूर के बगीचे में खेल रही 7 साल की मासूम बच्ची को तीन बच्चों के पिता रेमसिंह डुडवा पास की झाड़ी में खींच लिया और उसके दुष्कर्म के बाद उसके प्राइवेट पार्ट में चाकू घोंपकर भाग निकला था। आरोपी को कोई पछतावा नहीं है
इस मामले में राजकोट के पुलिस अधीक्षक विजय सिंह गुर्जर ने कहा कि सभी मेडिकल, टेक्निकल और हालात के सबूतों के अलावा बच्ची ने ने कोर्ट में आरोपी की पहचान की थी। राजकोट डिस्ट्रिक्ट पब्लिक प्रॉसिक्यूटर एस के वोरा ने कहा कि आरोपी ने इतना घिनौना काम किया है कि जब लड़की के प्राइवेट पार्ट में लोहे की रॉड डाली, तो बच्ची इतनी चिल्लाई और आरोपी के बाल खींच लिए थे। इससे अंदाजा लगा सकते हैं कि लड़की को कितना दर्द हुआ होगा। वहीं, आरोपी को इस शैतानी कृत्य के बाद भी कोई पछतावा नहीं है। उसके घरवाले भी उसे छोड़कर चले गए हैं। कोर्ट रूम में जज ने उससे पूछताछ की, लेकिन बिना किसी अफसोस के, वह बार-बार कहता रहा कि वह बेगुनाह है। क्या है पूरा मामला
4 दिसंबर को दोपहर 12 बजे आटकोट तालुका के कानपर गांव में पीड़ित लड़की अपने भाई-बहनों के साथ खेल रही थी, तभी आरोपी रेमसिंह तेरसिंह डुडवा (30 वर्ष ) मोटरसाइकिल पर आया और पीड़ित लड़की को उठाकर पास की झाड़ियों में ले गया और दुष्कर्म के बाद उसके प्राइवेट पार्ट में 5 इंच की लोहे की रॉड डाल दी थी। लड़की की चीखें सुनकर बगल के कमरे में मौजूद उसकी चाची दौड़कर आई, लेकिन आरोपी रेमसिंह मौके से भाग निकला था। पुलिस ने सायबर और टेक्निकल मदद से आरोपी तक पहुंची और बच्ची ने भी आरोपी की पहचान कर ली थी।
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