जीएसटी विंग दक्षिण क्षेत्र परवाणू की टीम ने की बड़ी कार्रवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
परवाणू (सोलन)। राज्य कर एवं आबकारी विभाग दक्षिण क्षेत्र परवाणू विंग ने स्टोन क्रशर और माइनिंग टैक्स पेयर्स के खिलाफ चलाए गए अभियान के तहत अब तक 2.82 करोड़ रुपये से अधिक जीएसटी की वसूली की है। अधिकारियों के अनुसार 10 मार्च 2026 तक करीब 7.45 करोड़ रुपये की एडज्यूडिकेटेड डिमांड में से 2,82,45,646 रुपये वसूल किए जा चुके हैं। यह जानकारी साउथ जोन में माइनिंग व मिनरल्स से जुड़े जीएसटी मामलों की ऑनलाइन समीक्षा बैठक में सामने आई। बैठक की अध्यक्षता राज्य कर एवं आबकारी विभाग के संयुक्त आयुक्त जीडी ठाकुर ने की। समीक्षा में सोलन, शिमला, किन्नौर और सिरमौर जिलों के करीब 180 टैक्स पेयर्स से जुड़े 137.41 करोड़ रुपये के आरसीएम टर्नओवर का मामला सामने आया। सोलन जिले के बीबीएन क्षेत्र के 38 स्टोन क्रशर ऐसे पाए गए हैं, जिनका आरसीएम टर्नओवर करीब 137.40 करोड़ रुपये है और इन पर लगभग 6.11 करोड़ रुपये टैक्स एलिमेंट बनता है। इन मामलों को आगे की कार्रवाई के लिए संयुक्त आयुक्त सेंट्रल जोन ऊना को भेजा गया है, ताकि उन स्टोन क्रशरों से 18 प्रतिशत जीएसटी की रिकवरी की जा सके जिन्होंने माइनिंग सामग्री की रॉयल्टी पर टैक्स जमा नहीं किया। जीडी ठाकुर ने बताया कि साल 2020-21 से 2024-25 के लिए मिनरल्स पर आरसीएम लागू करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट भी जीएसटी विभाग के पक्ष में फैसला दे चुका है। इसके बाद अब स्टोन क्रशर और माइनिंग टैक्स पेयर्स रॉयल्टी पर 18 प्रतिशत जीएसटी जमा करने पर कोई आपत्ति नहीं जता रहे हैं। साउथ जोन के सभी 21 सर्कल इंचार्ज को लंबित मामलों में एडज्यूडिकेशन और रिकवरी प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। जीडी ठाकुर ने स्पष्ट किया कि वित्त वर्ष 2020-21 से 2025-26 तक के बकाया आरसीएम टर्नओवर पर 18 प्रतिशत दर से देय जीएसटी की पूरी वसूली सुनिश्चित की जाएगी और सभी अधिकारियों को इसके लिए सख्त निर्देश जारी किए गए हैं।
मेसर्स अंबुजा सीमेंट्स लिमिटेड दाड़लाघाट से भी मांगी जानकारी
माइनिंग रॉयल्टी से जुड़े एक अन्य मामले में मेसर्स अंबुजा सीमेंट्स लिमिटेड दाड़लाघाट से भी जानकारी मांगी गई है। विभाग के अनुसार कंपनी की ओर से दिए गए जीएसटी डाटा और माइनिंग विभाग के रिकॉर्ड में करीब 85 करोड़ रुपये का अंतर सामने आया है। कंपनी को एक सप्ताह के भीतर स्पष्टीकरण देने को कहा गया है। जांच के बाद मामले में एचपीएसजीएसटी एक्ट और संबंधित प्रावधानों के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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