निशा ने बताया कि शुरुआती समय में उन्हें इस घटना की जानकारी भी नहीं थी. मम्मी-पापा ने हमें तुरंत कुछ नहीं बताया था और हमने भी उस समय कोई न्यूज नहीं देखी थी. अगली सुबह जब मैं उठी तो एक आंटी का फोन आया. उन्होंने पूछा कि क्या मम्मी-पापा से बात हुई है? जब मैंने कहा कि नहीं, तब उन्होंने बताया कि वहां अटैक हुआ है और तुरंत बात करो.
निशा ने बताया कि यह सुनकर उनका परिवार बेहद घबरा गया. उन्होंने तुरंत अपने पिता को फोन मिलाया, लेकिन कॉल नहीं लग पाया. जब पापा का फोन नहीं लगा तो हम और ज्यादा डर गए. थोड़ी देर बाद पापा का कॉल बैक आया और उन्होंने बताया कि वहां हालात ठीक नहीं हैं, लेकिन वे फिलहाल सुरक्षित हैं.
निशा के मुताबिक, उनके माता-पिता जिस जगह ठहरे हुए हैं, वहां से करीब 500 मीटर की दूरी पर भी अटैक की खबर आई थी. पापा ने बताया कि हम लोग होटल में ही हैं और बाहर नहीं निकल रहे हैं. होटल से थोड़ी दूरी पर भी अटैक हुआ था, इसलिए सब लोग डरे हुए हैं और होटल में ही रुकने की सलाह दी गई है. दूसरी बेटी पूजा ने बताया कि वे चार बहनें हैं और सभी अपने माता-पिता को लेकर बेहद चिंतित हैं. पूजा के अनुसार, उनके माता-पिता का असल में अबू धाबी में ठहरने का प्लान था, लेकिन हालात बिगड़ने के कारण उन्हें दुबई में ही शिफ्ट कर दिया गया.
कई बार फ्लाइट कैंसिल
पूजा ने कहा, “पहले उन्हें अबू धाबी में स्टे करना था, लेकिन वहां अटैक होने की वजह से उन्हें दुबई भेज दिया गया. हमें लगा कि वहां शायद हालात ठीक होंगे, लेकिन कुछ ही देर बाद वहां से करीब 500 मीटर की दूरी पर भी अटैक की खबर आ गई. उसके बाद से हम सभी बहुत ज्यादा डर गए. उनके माता-पिता की भारत लौटने की फ्लाइट 3 तारीख को तय थी, लेकिन हालात के कारण लगातार फ्लाइट कैंसिल होती जा रही हैं. 3 तारीख की उनकी रिटर्न फ्लाइट थी, लेकिन वह कैंसिल हो गई. उसके बाद भी कई बार फ्लाइट कैंसिल हो चुकी है, जिसके कारण वे अभी तक वापस नहीं आ पाए हैं.
सरकार से क्या अपील
चारों बहनों का कहना है कि वे लगातार अपने माता-पिता के संपर्क में हैं, लेकिन दूर होने के कारण चिंता और बढ़ जाती है. वे कहती हैं कि हम यहां भारत में बैठे-बैठे बहुत परेशान हैं. हर दिन यही सोचते हैं कि कब मम्मी-पापा सुरक्षित वापस घर लौटेंगे. परिवार ने सरकार से अपील करते हुए कहा है कि जो भी भारतीय नागरिक वहां फंसे हुए हैं, उन्हें जल्द से जल्द सुरक्षित वापस लाने की व्यवस्था की जाए. बेटियों का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि उनके माता-पिता जल्द ही सुरक्षित भारत लौट आएंगे और यह चिंता का दौर खत्म होगा.
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