बिहार के गोपालगंज जिले से एक बेहद मार्मिक और प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। यह कहानी एक ऐसी बेटी की है जिसने व्यवस्था की उदासीनता और अपनी शारीरिक परेशानी के बावजूद हार नहीं मानी। यह कहानी है 15 वर्ष की सोनी कुमारी की। उसके पैरों में ताकत नहीं है, लेकिन उसके इरादे इतने मजबूत हैं कि वह हर दिन कठिन रास्ता तय कर पढ़ाई करने विद्यालय पहुंचती है।
मंत्री के क्षेत्र की रहने वाली है सोनी
सोनी कुमारी शिक्षा मंत्री सुनील कुमार के विधानसभा क्षेत्र भोरे के रामनगर हुसेपुर गांव की रहने वाली है। वह एक जर्जर फूस की झोपड़ी में अपने परिवार के साथ रहती है। सोनी दोनों पैरों से पूरी तरह दिव्यांग है। हैरानी की बात यह है कि जिस उम्र में बच्चे उच्च विद्यालय की पढ़ाई पूरी कर लेते हैं, उस उम्र में सोनी पहली कक्षा में पढ़ रही है। गरीबी और साधनों की कमी के कारण उसके जीवन के कई शुरुआती वर्ष पढ़ाई से दूर गुजर गए। हालांकि पढ़ने की उसकी इच्छा कभी कमजोर नहीं हुई।
हर दिन दो किलोमीटर चलकर पहुंचती है विद्यालय
सोनी हर दिन करीब दो किलोमीटर का रास्ता तय कर विद्यालय जाती है। उसके पास चलने के लिए कोई विशेष गाड़ी या दूसरा साधन नहीं है। वह कच्ची और धूल भरी सड़कों पर अपने कमजोर पैरों के सहारे धीरे-धीरे चलकर विद्यालय पहुंचती है। कई बार वह रास्ते में गिर भी जाती है, लेकिन फिर संभलकर आगे बढ़ जाती है।
जन्म से ही संघर्षों से भरा रहा जीवन
सोनी का जीवन शुरू से ही कठिनाइयों से भरा रहा है। उसकी मां लाईची देवी बताती हैं कि सोनी के जन्म के कुछ समय बाद ही उसके पिता नंदकिशोर राम का निधन हो गया था। घर की आर्थिक स्थिति बहुत खराब है। परिवार के लोग खेतों में मजदूरी करके किसी तरह दो वक्त का भोजन जुटाते हैं। इसी गरीबी के कारण सोनी को बचपन में विद्यालय नहीं भेजा जा सका।
पढ़कर डॉक्टर बनना चाहती है सोनी
सोनी ने जब गांव की अन्य लड़कियों को विद्यालय की पोशाक पहनकर पढ़ने जाते देखा, तो उसने भी पढ़ने की जिद कर ली। आज वह विद्यालय जा रही है और मन लगाकर पढ़ाई कर रही है। सोनी का सपना है कि वह आगे चलकर डॉक्टर बने और समाज के लोगों की सेवा करे।
बच्ची का हौसला देखकर लोग कर रहे मदद की मांग
सोनी के संघर्ष का एक दृश्य अब समाज माध्यमों पर तेजी से फैल रहा है। लोग उसके साहस और जज्बे की सराहना कर रहे हैं। साथ ही जिला प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि सोनी को जल्द से जल्द चलने के लिए तीन पहियों वाली गाड़ी और अन्य सरकारी सुविधाएं दी जाएं, ताकि उसकी पढ़ाई आसान हो सके।
इस मामले की चर्चा अब प्रशासनिक स्तर तक भी पहुंच गई है।
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