संतोष पंडित ने इंटर-कास्ट विवाह कर वह कदम उठाया है. जो समाज में बराबरी और आपसी सम्मान की भावना को बढ़ावा देने वाला उदाहरण लोगों के बीच खूब सराहा जा रहा है.
दहेज प्रथा के खिलाफ मजबूत आवाज
शादी में संतोष पंडित ने दहेज प्रथा को पूरी तरह नकार दिया. न उन्होंने दहेज लिया और न ही किसी तरह की मांग रखी. उनका कहना है कि दहेज जैसी कुप्रथा खत्म होनी चाहिए और समाज को इसके खिलाफ एकजुट होकर खड़ा होना होगा. शिक्षक होने के नाते उन्होंने इस कुरीति के खिलाफ एक आदर्श स्थापित किया है.
पर्यावरण संरक्षण के लिए अनोखी बारात
बारात की बात करें तो यह शादी का सबसे आकर्षक और चर्चा योग्य हिस्सा बना. आमतौर पर जहां बारातें भव्य गाड़ियों और डीजे के शोर के साथ निकलती हैं, वहीं संतोष पंडित ने बैटरी संचालित टोटो और ई-रिक्शा से बारात निकाली. पूरा परिवार और बाराती पर्यावरण-सुरक्षा का संदेश देते हुए ई-रिक्शा में सवार होकर विवाह स्थल पहुंचे.
शादी का कार्ड भी बना आकर्षण
उनकी शादी का पर्यावरण आधारित कार्ड लोगों के बीच खास चर्चा में रहा. कार्ड में “पर्यावरण बचाओ, जीवन बचाओ” के साथ स्वच्छता, प्रदूषण नियंत्रण और नशा मुक्ति जैसे संदेश शामिल थे, जिसने इसे बेहद खास बना दिया.
विद्यार्थियों के लिए रिसेप्शन- एक अलग पहल
विवाह के बाद संतोष पंडित ने अपने विद्यालय में विद्यार्थियों के लिए एक अनोखा रिसेप्शन आयोजित किया. स्कूल परिसर में टेंट लगाए गए, हलवाइयों ने स्वादिष्ट पकवान तैयार किए और सभी बच्चों को भरपेट भोजन कराया. इस आयोजन में शिक्षा के प्रति सम्मान, समानता और अपनापन स्पष्ट झलक रहा था. संतोष पंडित की यह शादी न सिर्फ चर्चा का विषय है, बल्कि समाज में बदलाव की दिशा में एक बड़ा संदेश भी देती है. उन्होंने साबित कर दिया कि शादी सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि बदलाव का अवसर भी हो सकती है.
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