दीपक कुमार गोड्डा जिले के लड़के और लड़कियों को निःशुल्क मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग देकर उन्हें आत्मरक्षा के साथ-साथ आत्मविश्वास भी सिखा रहे हैं.
गोड्डा जिला अंतर्गत पथरगामा प्रखंड के रांगाताड़ गांव स्थित विवाह भवन में दीपक द्वारा संचालित निःशुल्क मार्शल आर्ट ट्रेनिंग सेंटर आज क्षेत्र के बच्चों के लिए उम्मीद की एक नई किरण बन चुका है. इस प्रशिक्षण केंद्र में प्रतिदिन करीब 35 लड़के और लड़कियां नियमित रूप से अभ्यास करते हैं. खास बात यह है कि यहां प्रशिक्षण लेने वाले कई बच्चों ने राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर गोल्ड मेडल तक हासिल किया है, जिससे पूरे जिले का नाम रोशन हुआ है.
निःशुल्क मार्शल आर्ट प्रशिक्षण से बदल रहे बच्चों का भविष्य.
दीपक कुमार ने लोकेल 18 से बातचीत में बताया कि वे पहले सरकार की ओर से गोड्डा जिले के विभिन्न सरकारी स्कूलों में मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग दिया करते थे. इसी दौरान टीवी चैनलों और अखबारों में लगातार लड़कियों के साथ हो रहे दुष्कर्म, हिंसा और प्रताड़ना की खबरें देखकर वे अंदर से आहत हो गए. उन्होंने महसूस किया कि केवल सरकारी योजनाएं काफी नहीं हैं, बल्कि समाज के हर व्यक्ति को अपनी भूमिका निभानी होगी.
महिलाओं को किया जा रहा है सशक्तिकरण
इसी सोच के साथ दीपक ने निःशुल्क मार्शल आर्ट ट्रेनिंग सेंटर शुरू करने का निर्णय लिया. उन्होंने जिला प्रशासन से संपर्क किया, जिसके बाद प्रशासन की मदद से पथरगामा के रांगाताड़ गांव स्थित विवाह भवन में केंद्र को शुरू करने की स्वीकृति मिली. आज इस केंद्र के माध्यम से दर्जनों बच्चे न सिर्फ आत्मरक्षा के गुर सीख रहे हैं, बल्कि खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने का सपना भी साकार कर रहे हैं. दीपक का मानना है कि मार्शल आर्ट केवल एक खेल नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है. यह बच्चों में अनुशासन, आत्मविश्वास और साहस पैदा करता है, खासकर लड़कियों के लिए आत्मरक्षा का मजबूत हथियार बन सकता है. उनका यह प्रयास न सिर्फ सरकारी योजनाओं को मजबूती दे रहा है, बल्कि समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण भी पेश कर रहा है.
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