गिरिडीह के नगर थाना क्षेत्र स्थित विश्वनाथ नर्सिंग होम में इलाज के दौरान एक महिला की मौत हो गई। इसके बाद सोमवार को परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया और तोड़फोड़ की। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। मृतका की पहचान डुमरी थाना क्षेत्र के जितकुंडी निवासी 35 वर्षीय नीलम कुमारी (पति मुकेश मंडल) के रूप में हुई है। उनके पति मुकेश मंडल ने बताया कि नीलम को बच्चादानी के ऑपरेशन के लिए 14 मार्च को विश्वनाथ नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था। ऑपरेशन से पहले इलाज का शुल्क जमा किया गया और खून की भी व्यवस्था की गई थी। मुकेश मंडल के अनुसार, ऑपरेशन के बाद सोमवार को नीलम की तबीयत अचानक बिगड़ गई। परिजनों का आरोप है कि जब वे मरीज से मिलने की कोशिश कर रहे थे, तो अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें मिलने नहीं दिया और कहा कि इलाज चल रहा है। उन्हें बार-बार पर्दे के पीछे रखा गया। कुछ देर बाद जब महिला की मौत की सूचना मिली, तो परिजन जबरन अंदर जाने लगे। इसी दौरान अस्पताल कर्मियों और परिजनों के बीच कहासुनी हुई, जो मारपीट में बदल गई। अस्पताल प्रबंधन ने उसे समय पर रेफर नहीं किया: परिजन परिजनों का यह भी आरोप है कि महिला की हालत गंभीर होने पर अस्पताल प्रबंधन ने उसे समय पर रेफर नहीं किया, जबकि वे लगातार रेफर करने की मांग कर रहे थे। इस घटना के बाद आक्रोशित लोगों ने अस्पताल में तोड़फोड़ कर दी। घटना की सूचना मिलते ही डीएसपी नीरज सिंह, नगर थाना प्रभारी रतन कुमार सिंह और इंस्पेक्टर मंटु कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने स्थिति को नियंत्रित किया और पुलिस मामले की जांच कर रही है। स्टाफ ने इधर-उधर भागकर अपनी जान बचाई: डॉ. एस.के. डोकानिया इधर, इस मामले में डॉ. एस.के. डोकानिया ने बताया कि घटना हुई है, लेकिन रात में महिला का ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया गया था और ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति सामान्य थी। उन्होंने कहा कि सुबह अचानक महिला की तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद डॉ. नीरज डोकानिया की देखरेख में मरीज को आईसीयू में भर्ती कर इलाज शुरू किया गया। एस.के. डोकानिया के अनुसार, इलाज के दौरान मरीज की स्थिति लगातार नाजुक होती चली गई और काफी प्रयास के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका। डॉक्टरों के मुताबिक, ब्लड क्लॉटिंग की समस्या के कारण मरीज की हालत गंभीर हो गई थी। उन्होंने यह भी बताया कि घटना के बाद अस्पताल में हंगामा और तोड़फोड़ की गई। अस्पताल के स्टाफ ने अपनी सुरक्षा को लेकर इधर-उधर भागकर जान बचाई। वहीं अस्पताल कर्मियों पर मारपीट का जो आरोप लगाया जा रहा है, उसे उन्होंने पूरी तरह बेबुनियाद बताया।
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