गया के वजीरगंज प्रखंड स्थित मध्य विद्यालय दखिनगांव में आज से तीन दिवसीय राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन स्वास्थ्य कैंप शुरू हो गया है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य स्कूली बच्चों को फाइलेरिया से बचाव की दवा उपलब्ध कराना और रोग के प्रति जागरूकता फैलाना है। कैंप के पहले दिन स्वास्थ्य विभाग की टीम ने स्कूल के बच्चों को डीईसी (डायथाइलकार्बामाज़ीन) और अल्बेंडाजोल की दवा खिलाई। विद्यार्थियों को फाइलेरिया रोग के कारण, लक्षण, बचाव और उपचार के बारे में विस्तृत जानकारी भी दी गई। स्वास्थ्यकर्मियों ने बताया कि फाइलेरिया मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से फैलने वाला एक संक्रामक रोग है, जिसे आमतौर पर ‘हाथीपांव’ के नाम से जाना जाता है। उन्होंने जोर दिया कि समय पर दवा का सेवन और उचित स्वच्छता बनाए रखने से इस बीमारी की रोकथाम संभव है। स्वास्थ्य विभाग हर साल विशेष अभियान चलाता पीरामल फाउंडेशन के मॉनिटर जय किशन, जो वजीरगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से आए थे, ने इस कार्यक्रम में बताया कि सरकार का लक्ष्य देश को पूरी तरह से फाइलेरिया मुक्त बनाना है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग हर साल विशेष अभियान चलाता है, जिसके तहत घर-घर और स्कूलों में मुफ्त दवा दी जाती हैं। उन्होंने बच्चों से नियमित रूप से दवा का सेवन करने और मच्छरों से बचाव के सभी आवश्यक उपाय अपनाने की अपील की। कैंप के दौरान आशा फैसिलिटेटर सरिता सिन्हा और आशा कार्यकर्ता संजू कुमारी, मधु कुमारी व द्रौपदी कुमारी ने सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने बच्चों को साफ-सफाई बनाए रखने, अपने आसपास पानी जमा न होने देने और मच्छरदानी का उपयोग करने की सलाह दी। स्कूल के शिक्षकों ने भी इस अभियान को सफल बनाने में सहयोग किया और विद्यार्थियों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने के लिए प्रेरित किया। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, ऐसे जागरूकता अभियानों से समाज में फाइलेरिया के प्रति समझ बढ़ेगी और सामूहिक प्रयासों से इस बीमारी के उन्मूलन का लक्ष्य हासिल किया जा सकेगा। यह तीन दिवसीय कैंप आसपास के बच्चों और उनके अभिभावकों को भी लाभान्वित करेगा।
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