Gariyaband News: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के सुपेबेडा गांव में पानी की वजह से किडनी बीमारी का गंभीर संकट है, जिससे 2005 से अब तक 133 लोगों की मौत हो चुकी है. हाल ही में एम्स और संबलपुर यूनिवर्सिटी की टीम, जिसमें नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. विनय राठौर भी शामिल थे, ने गांव में शिविर लगाकर पानी और लोगों के स्वास्थ्य की जांच की.
40 से ज्यादा ब्लड सैंपल लिए गए
टीम ने गांव के 40 से ज्यादा लोगों के ब्लड सैंपल भी लिए, ताकि यह समझा जा सके कि किडनी की बीमारी कितनी गंभीर है और लोगों में इसके प्रभाव कितने हैं. इससे स्वास्थ्य विशेषज्ञों को बीमारी के स्रोत और प्रभाव का सही आंकलन करने में मदद मिलेगी. इस शिविर के माध्यम से किडनी प्रभावित मरीजों के लिए टेली मेडिसिन सुविधा भी शुरू की गई है. अब मरीज सप्ताह में दो दिन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए एम्स के विशेषज्ञों से सीधे जुड़ सकते हैं.
डॉ. विनय राठौर और अन्य विशेषज्ञ इन सत्रों में मरीजों को उनकी बीमारी के अनुसार जरूरी सलाह देंगे, इलाज की दिशा बताएंगे और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का समाधान सुझाएंगे. इस पहल से सुपेबेडा गांव के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी और उन्हें बार-बार शहर या अस्पताल आने की जरूरत नहीं पड़ेगी. इससे न केवल मरीजों को राहत मिलेगी, बल्कि बीमारी पर काबू पाने के लिए लंबे समय तक प्रभावी रणनीति बनाई जा सकेगी. सुपेबेडा में यह कदम किडनी रोग से जूझ रहे गांववासियों के लिए उम्मीद की किरण साबित हो रहा है.
About the Author
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.