Apple Ber Farming Profit: रिटायरमेंट के बाद लोग अक्सर आराम की सोचते हैं, लेकिन गोंडा के एक शिक्षक ने ‘विदेशी बेर’ उगाकर लाखों की कमाई शुरू कर दी है. वनस्पति विज्ञान (Botany) के टीचर रहे अक्षैबर सिंह अब ‘बाल सुंदरी एप्पल बेर’ की खेती कर रहे हैं. आधे एकड़ से 3 लाख तक का मुनाफा कमाने वाले इस किसान की कहानी अब पूरे इलाके के लिए मिसाल बन गई है. जानिए कैसे आप भी एक बार निवेश करके सालों तक लाखों कमा सकते हैं.
सही तकनीक से मिलती है अच्छी पैदावार
अक्षैबर सिंह पेशे से शिक्षक रहे हैं. उन्होंने बीएससी और बीएड करने के बाद सालों तक वनस्पति विज्ञान (Botany) के शिक्षक के तौर पर बच्चों को पेड़-पौधों की बारीकियां सिखाईं. साल 2022 में जब वे रिटायर हुए, तो उन्होंने सोचा कि क्यों न किताबी ज्ञान को जमीन पर उतारा जाए. उन्होंने 3 साल पहले वैज्ञानिक तरीके से खेती की शुरुआत की.
अक्षैबर सिंह को बेर की खेती का ख्याल कटरा और बस्ती जिले के हैदराबाद क्षेत्र के किसानों से आया. जिसके बाद उन्होंने इंटरनेट और यूट्यूब का सहारा लिया और कोलकाता की एक नर्सरी से ‘बाल सुंदरी एप्पल बेर’ के पौधे मंगवाए. यह बेर कोई मामूली फल नहीं है; यह दिखने में बिल्कुल छोटे सेब जैसा लगता है, इसीलिए इसे ‘एप्पल बेर’ कहा जाता है. अप्रैल में लगाए गए इन पौधों ने महज एक साल के भीतर ही फलों का अंबार लगा दिया. ये फल न सिर्फ बड़े और सुंदर होते हैं, बल्कि खाने में इतने मीठे हैं कि बाजार में इनकी मांग सबसे ज्यादा रहती है.
कम लागत में लाखों का मुनाफा
अक्षैबर सिंह बताते हैं कि आधे एकड़ में खेती शुरू करने में उनका कुल खर्च 40 से 50 हजार रुपये के बीच आया था. इसमें खेत की तैयारी से लेकर पौधों की रोपाई तक सब शामिल था.
बंपर पैदावार: एक ही साल में फल आने शुरू हो गए. आज आलम यह है कि एक ही पौधे से 40 से 50 किलो तक फल निकल रहे हैं.
शानदार इनकम: आधे एकड़ की इस छोटी सी जमीन से उन्हें साल भर में 2.5 से 3 लाख रुपये की कमाई हो रही है. सबसे खास बात यह है कि इसमें हर साल भारी खर्च नहीं करना पड़ता, बस एक बार का निवेश और सालों की कमाई.
अक्षैबर सिंह की किस्मत ने एक और मोड़ तब लिया जब उनकी फसल के लिए ग्राहक खुद खेत तक आने लगे. अयोध्या के पास होने के कारण उन्हें अपना माल बेचने के लिए मंडियों के चक्कर नहीं काटने पड़ते. ग्राहक सीधे खेत से ही ‘बाल सुंदरी एप्पल बेर’ खरीद ले जाते हैं. अभी वे सिर्फ आधे एकड़ में काम कर रहे हैं, लेकिन इसकी सफलता को देखते हुए मास्टर साहब अब मार्च-अप्रैल में करीब 2 एकड़ में इसका विस्तार करने जा रहे हैं. वे अन्य किसानों को भी यही सलाह देते हैं कि खेती को अगर बिजनेस की तरह किया जाए, तो यह किसी सरकारी नौकरी से कम नहीं है.
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